MHA: 'प्रतिबिंब' ने पहुंचाया 29837 आरोपियों को सलाखों के पीछे, साफ नजर आई अपराधियों और नेटवर्क की लोकेशन

केंद्रीय गृह मंत्रालय का 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल, अपराधियों और क्राइम से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने में कारगर साबित हो रहा है। इस मॉड्यूल की मदद से अपराधियों की लोकेशन मैप पर दिखती है और संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को इसकी जानकारी मिल जाती है। यह मॉड्यूल कानून लागू करने वाली एजेंसियों को I4C और अन्य विशेषज्ञों से तकनीकी-कानूनी सहायता मांगने और प्राप्त करने में भी मदद करता है। इसके कारण 29,837 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। साइबर अपराध से जुड़ा डेटा शेयर करना गृह मंत्रालय के निर्देशन में 'समन्वय' प्लेटफ़ॉर्म को साइबर अपराध से जुड़े डेटा को शेयर करने और उसका विश्लेषण करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सिस्टम को कानून लागू करने वाली एजेंसियों के एक मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम प्लेटफ़ॉर्म, डेटा रिपॉजिटरी और कोऑर्डिनेशन प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर चालू किया गया है। यह अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध की शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के बीच विश्लेषण-आधारित अंतर-राज्यीय संबंध दिखाता है। 'स्टेट', 'थाना' और 'बैंक' कनेक्ट गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) की स्थापना की है। I4C के हिस्से के तौर पर 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) (https://cybercrime.gov.in) लॉन्च किया गया है, ताकि आम लोग सभी तरह के साइबर अपराधों की घटनाओं की रिपोर्ट कर सकें। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। I4C, नियमित रूप से 'स्टेट कनेक्ट', 'थाना कनेक्ट', 'बैंक कनेक्ट' और पीयर लर्निंग सेशन आयोजित कर रहा है, ताकि बेहतरीन तरीकों को साझा किया जा सके और क्षमता बढ़ाई जा सके। साइबर अपराध से निपटने के लिए तुरंत कार्रवाई I4C में एक अत्याधुनिक 'साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर' (सीएफएमसी) बनाया गया है। यहां प्रमुख बैंकों, फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज, पेमेंट एग्रीगेटर्स, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, आईटी इंटरमीडियरीज और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि मिलकर काम कर रहे हैं ताकि साइबर अपराध से निपटने के लिए तुरंत कार्रवाई और बेहतर सहयोग हो सके। I4C के तहत सात 'जॉइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीमें' बनाई गई हैं। ये टीमें मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी जैसे साइबर अपराध के हॉटस्पॉट या उन इलाकों को कवर करती हैं, जहां कई अधिकार क्षेत्रों से जुड़े मामले होते हैं। इन टीमों में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करके उनकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाया गया है। 32 लाख 'लेयर 1 म्यूल अकाउंट्स' की जानकारी I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर साइबर अपराधियों की पहचान से जुड़ी जानकारी वाली एक 'सस्पेक्ट रजिस्ट्री' (संदिग्धों की सूची) शुरू की है। 30 जून तक, बैंकों से संदिग्धों की पहचान से जुड़ा 30.48 लाख से ज़्यादा डेटा और 32.08 लाख 'लेयर 1 म्यूल अकाउंट्स' की जानकारी सस्पेक्ट रजिस्ट्री में शामिल संस्थाओं के साथ साझा की गई है। 25,698 करोड़ रुपये के ट्रांज़ैक्शन रोके गए हैं। साइबर अपराधों (जिनमें AI-आधारित साइबर अपराध भी शामिल हैं) से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के तंत्र को मज़बूत करने और साइबर सुरक्षा क्षमता (साइबर रेजिलिएंस) को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। 281 साइबर कमांडो की ट्रेनिंग पूरी देश में साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए खास ट्रेनिंग पाए साइबर कमांडो की एक स्पेशल विंग बनाने के मकसद से गृह मंत्री ने साइबर कमांडो प्रोग्राम शुरू किया था। इस प्रोग्राम का मकसद एक ऐसी समर्पित और कुशल वर्कफोर्स तैयार करना है जो अहम सूचना इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रख सके और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रयासों में मदद कर सके। अभी तक 281 साइबर कमांडो ने सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी की है। नोटिस भेजने की प्रक्रिया में तेजी 'सहयोग' पोर्टल को आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 की उप-धारा (3) के खंड (b) के तहत उचित सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए लॉन्च किया गया है। इसका मकसद किसी गैर-कानूनी काम को करने के लिए इस्तेमाल की जा रही जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक को हटाने या उसके एक्सेस को बंद करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। गृह मंत्रालय ने पिछले साल मल्टी एजेंसी सेंटर प्लेटफ़ॉर्म के तहत सीवाईमैक (साइबर मल्टी एजेंसी सेंटर) की स्थापना की है। इसका मकसद साइबर सुरक्षा खतरों, साइबर जासूसी, उभरती हुई तकनीकों के गलत इस्तेमाल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी ऐसी ही अन्य चिंताओं से प्रभावी ढंग से निपटना है। कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की सुरक्षा CERT-In लगातार साइबर खतरों/कमज़ोरियों (जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किए गए खतरनाक हमले भी शामिल हैं) और कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की सुरक्षा के उपायों के बारे में अलर्ट और सलाह जारी करता है। CERT-In द्वारा लागू नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर, साइबर सुरक्षा खतरों का पता लगाने के लिए साइबरस्पेस की निगरानी करता है। यह कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य सरकारों, अलग-अलग सेक्टर के संगठनों और स्टेकहोल्डर एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करता है। खतरनाक डोमेन और फ़िशिंग गतिविधियों का पता लगाने और ज़रूरी उपाय करने के लिए CERT-In AI-आधारित सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्टम का इस्तेमाल करता है। CERT-In एक ऑटोमेटेड साइबर थ्रेट एक्सचेंज प्लेटफ़ॉर्म चलाता है। यह प्लेटफ़ॉर्म सक्रिय रूप से खतरे की जानकारी इकट्ठा करता है, उसका विश्लेषण करता है। उसके बाद जानकारी को राज्य सरकारों व अलग-अलग सेक्टर के संगठनों के साथ खास अलर्ट साझा करता है ताकि वे खतरों को रोकने के लिए पहले से ही कदम उठा सकें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 12, 2026, 15:59 IST
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