Champawat: नदियों, झीलों, जल स्रोतों में माइक्रो प्लास्टिक के रहस्य से उठाएंगे पर्दा, जानिए कैसे?
केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के प्रायोगिक मत्स्य प्रक्षेत्र छीड़ापानी में नदियों में माइक्रो प्लास्टिक के रहस्य से पर्दा उठेगा। तीन साल तक जम्मू कश्मीर में शोध कार्य किया जाएगा। वर्तमान में वहां के 18 स्थानों से इसके सैंपल लिए गए हैं। संस्थान में वैज्ञानिक नदियों, झीलों में माइक्रो प्लास्टिक के बारे में पूरी जानकारी जुटाएंगे। जम्मू कश्मीर में शोध पूरा होने के बाद उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में रिसर्च किया जाएगा। कैंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कुणाल किशोर ने बताया कि नदियों, झीलों और जल स्रोतों में माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। इस पर ध्यान देने और समाधान खोजने की आवश्यकता है। जेएंडके की नदियों में माइक्रो प्लास्टिक की स्थिति का पता लगाया जा रहा है। तीन साल के शोध कार्य में दो साल का शोध हो चुका है। एक साल का शोध कार्य चल रहा है। वहां की नदियों में पाई जाने वाली अलग-अगल प्रकार की मछलियों पर इसका कितना असर देखने को मिल रहा है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। बताया कि इसके बाद संस्थान उत्तराखंड में शोध कार्य करेगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 05, 2025, 14:38 IST
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