Guna News: निर्धन व्यक्ति अर्जी लगाए तो भिखारी नहीं हो जाता, मंत्री प्रहलाद पटेल के बयान पर बोले जयवर्धन सिंह

गुना में अल्प प्रवास पर आए पूर्व मंत्रीजयवर्धन सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि यदि कोई निर्धन व्यक्ति सरकारी दफ्तर में शासकीय योजनाओं का लाभ लेने की उम्मीद से जाता है, तो उसे भिखारी कहना उचित नहीं है। पटेल के बयान से उन परिवारों का अपमान हुआ है जो गरीबी के कारण केवल शासकीय योजनाओं के लाभ पर निर्भर हैं। जयवर्धन सिंह ने प्रहलाद पटेल के बयान पर दी गई सफाई को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब आप मंच से बोलते हैं तो पूरे प्रदेश में उसका संदेश जाता है। कार्यक्रम चाहे निजी हो, सार्वजनिक हो या शासकीय, एक मंत्री का ऐसा बयान निंदनीय है। टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापना को लेकर कलेक्टर से मुलाकात गुना प्रवास के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने गुरुवार दोपहर कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से मुलाकात की। उन्होंने पीपलखेड़ी में भील-आदिवासी समाज द्वारा लगाई जा रही क्रांतिकारी टंट्या मामा की प्रतिमा के संबंध में कलेक्टर को अवगत कराया। जयवर्धन सिंह ने बताया कि प्रतिमा लगाने का निर्णय ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर लिया गया था। अब जनपद पंचायत ने भी पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन कलेक्टर को भेज दिया है। उन्हें उम्मीद है कि भोपाल से भी टंट्या मामा की प्रतिमा लगाने की अनुमति जल्द ही मिल जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को प्रतिमा लगाने से आपत्ति थी, लेकिन वे पूरी प्रक्रिया का पालन करवा रहे हैं। भू-माफिया और पुलिस का गठजोड़ जयवर्धन सिंह ने हाईकोर्ट द्वारा अशोकनगर जिले में सहरिया-आदिवासियों से संबंधित जमीनों के क्रय-विक्रय की जांच के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में शिकायत करने वालों पर ही पुलिस कार्रवाई कर रही है और उन्हें ही जेल भेजा जा रहा है। जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि भू-माफिया और पुलिस के बीच गठजोड़ हो गया है। उन्होंने इस तरह के मामलों को गुना कलेक्टर के संज्ञान में भी लाया है। वहीं, अशोकनगर में जमीनों की जांच संबंधी आदेश से शोषित लोगों को न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। कर्ज तले दब गई सरकार, हर कोई परेशान पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए राशि आवंटित न होने पर मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार कर्ज के दलदल में बुरी तरह फंस गई है। 70 प्रतिशत बजट का पैसा कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रहा है, जिससे नगरीय निकायों के पास पैसा नहीं है। हाल ही में नगरपालिका के प्रतिनिधि भोपाल में धरना दे चुके हैं। वहीं, नरेगा जैसी योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि भी प्रदेश सरकार ने बंद कर दी है, जिससे सरपंच परेशान हैं और लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 07, 2025, 06:26 IST
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