बदहाल पाकिस्तान: जफर एक्सप्रेस की खबर दहलाने वाली... अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित बोलन स्टेशन पर बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के अलगाववादियों द्वारा जफर एक्सप्रेस ट्रेन को अगवा करने और 180 से भी ज्यादा यात्रियों को बंधक बनाने की खबर दहलाने वाली तो है ही, पहले से ही खस्ताहाल पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यह घटना पाकिस्तान में अराजकता और बढ़ते जन असंतोष को भी दर्शाती है। बलूचिस्तान से गुजरने वाली जफर एक्सप्रेस पर यह कोई पहला हमला नहीं है। दरअसल, इस ट्रेन पर अक्सर सरकारी कर्मचारी, सैनिक और अधिकारी वगैरह चलते हैं, इसीलिए बीएलए की इस पर नजर रहती है। उल्लेखनीय है कि बीएलए अफगानिस्तान के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय एक बलूच राष्ट्रवादी चरमपंथी संगठन है, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कर स्वतंत्र राष्ट्र बनाना है। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी समृद्ध प्रांत है और उसकी लड़ाई इस बात को लेकर है कि पाकिस्तान उसके संसाधनों का दोहन तो करता है, लेकिन बदले में स्थानीय लोगों को कोई फायदा नहीं मिलता। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ भी यह पिछले करीब सात दशकों से लड़ रहा है। चूंकि बीएलए की गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर पूरा समर्थन मिला हुआ है, इसलिए पाकिस्तान ने बात करने के बजाय 2006 में ही बीएलए पर प्रतिबंध लगा दिया था। गौरतलब है कि आईएमएफ के कर्ज के बोझ तले पाकिस्तान आर्थिक बदहाली से तो जूझ ही रहा है, वैश्विक आतंकवाद सूचकांक की 2025 की रिपोर्ट में भी उसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आतंक प्रभावित देश बताया गया था। आंकड़े यह भी बताते हैं कि 2024 में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 1,600 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जो पिछले एक दशक में सर्वाधिक मौतों वाला वर्ष भी है। विडंबना देखिए कि पाकिस्तान ने जिस आतंक को हमेशा प्रश्रय दिया, आज वही उसके भी गले की हड्डी बना हुआ है। आज के हालात देखते हुए तो गनीमत समझी जानी चाहिए कि पाकिस्तान में हाल ही में आयोजित आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी सुरक्षित ढंग से निपट गई।  अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अगर पाकिस्तान इस स्थिति को ठीक ढंग से नहीं संभाल पाया, तो यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान की फितरत कुछ ऐसी है कि वह जब भी आंतरिक मुद्दों से जूझता है, तो ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी सुर अलापने लगता है, ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह पूरी सतर्कता के साथ पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 12, 2025, 05:38 IST
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