MP Budget 2025:नए बजट में ट्रिपल टी यानि टेक्सटाइल्स, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी पर जोर

प्रदेश सरकार ने नए बजट से मध्यप्रदेश के विकास की रफ्तार देने की कोशिश की है। यह बजय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर बजट के तहत राजकोषीय अनुशासन का भी पूरी तरह ध्यान रखा गया है। नए बजट में न तो कोई नया कर लगाया गया है, और न ही किसी योजना को बंद किया गया है। नए बजट में ट्रिपल टी यानी टेक्सटाइल्स, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी इन तीन नए सेक्टरों की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। खास बात यह भी है कि इस बजट में पिछले वर्ष की तुलना में पूंजीगत परिव्यय में भारी वृद्धि की गई है। इसका आकार 85 हजार 76 करोड़ रुपये है और कुल पूँजीगत परिव्यय राज्य के कुल बजट आकार का करीब 22 फीसदी है। इससे विकास और रोजगार की नई राह खुलती दिखाई देगी। इससे जुड़ी खबर पढ़ें-: कृष्ण पाथेय योजना पर खर्च होंगे दस करोड़, गुजरात व राजस्थान सरकार भी करेगी मदद वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मध्यप्रदेश के बजट का आकार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचते हुए पिछले वर्ष के तीन लाख 65 हजार 67 करोड़ रुपए से बढ़कर 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ की ऊँचाई पर है। राजस्व व्यय 2 लाख 90 हजार 261 रुपए हैं। नए बजट की खास बात यह है कि यह 618 करोड़ रुपए राजस्व आधिक्य का बजट है। राजकोषीय घाटा 78 हजार 902 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 4.66 फीसदी अनुमानित है। बजट में वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश को तेजगति से विकास की डगर पर आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक आवंटन किए गए हैं। नया बजट ग्रामीण विकास व सिंचाई, औद्योगिक विकास तथा बुनियादी ढाँचे के विकास पर केंद्रित है। कृषि बजट बढ़ा है। नए बजट में शहरीकरण की झलक भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। इंदौर-भोपाल में मेट्रो के लिए विशेष बजट प्रावधान हैं। नए बजट में पर्यटन, धर्म व संस्कृति पर बजट बढ़ाया गया है। मेक इन मध्यप्रदेश और वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहन देने के प्रावधान है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के विशेष प्रावधान भी नए बजट में हैं। शैक्षणिक गुणवत्ता और कौशल विकास पर फोकस किया गया है। सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रदेश की सभी फ्लैगशिप स्कीमों के लिए अधिक धन आवंटित किया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में प्राप्त हुए 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए नई रणनीतियों का ऐलान किया है। इस बजट की सफलता के लिए कई बातों पर ध्यान देना होगा। नए बजट के तहत रखे गए निर्धारित लक्ष्यों के क्रियान्यवन और बजट के उपयोग पर वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही पूरी तरह ध्यान दिया जाना होगा। यह भी जरूरी है कि प्रदेश की जीएसडीजी में कृषि और उद्योग का योगदान बढ़ाने के लिए इन क्षेत्रों के बजट आवंटन का पूरा उपयोग करने की रणनीति के साथ आगे बढ़ा जाए। कौशल, विकास एवं नवाचार पर बजट का और अधिक खर्च जरूरी था। अब फ्री बीज खासतौर से बिजली सब्सिडी और लाड़ली बहना का खर्च मध्य प्रदेश के खजाने पर भारी पड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 के प्रादेशिक बजट में राजकोषीय घाटे का आकार 4.66 फीसदी दिखाई दे रहा है, जो कि वित्त वर्ष 2024-25 में 4.11 फीसदी रहा था। स्थिति यह है कि सरकार पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। यह वित्तीय वर्ष 2024-25 में सवा चार लाख करोड़ रुपये के आसपास हो गया है। मध्यप्रदेश के नए बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वित्तमंत्री वर्ष 2025-26 के बजट के तहत रखे गए निर्धारित लक्ष्यों के क्रियान्यवन पर पूरी तरह ध्यान देंगे। साथ ही राजस्व और राजकोषीय घाटे पर उपयुक्त नियंत्रण रखेंगे। ऐसे में वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश के विभिन्न वर्गों की मुस्कुराहट के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी रफ्तार के साथ आगे बढ़ते हुए दिखाई देंगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 12, 2025, 19:22 IST
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