एमपी: एमपी ने ई-मोबिलिटी में लगाई 16 पायदान की छलांग, सातवें स्थान पर पहुंचा; ई-वाहनों के पंजीयन 124% बढ़े

प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार का असर अब राष्ट्रीय इंडेक्स में भी दिखाई दे रहा है। नीति आयोग के इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स-2025 में मध्य प्रदेश बड़े राज्यों की श्रेणी में 7वें स्थान पर पहुंच गया है। एक साल पहले प्रदेश 23वें स्थान पर था। यानी रैंकिंग में 16 पायदान का सुधार हुआ है। प्रदेश का इंडेक्स स्कोर भी 31 से बढ़कर 59 हो गया है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश को बड़े राज्यों में फ्रंट रनर श्रेणी में रखा गया है। इंडेक्स में राज्यों के ईवी इकोसिस्टम को परिवहन विद्युतीकरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवी रिसर्च-इनोवेशन जैसे पहलुओं के आधार पर देखा गया है। ये भी पढ़ें-नमामि भारतम्: मध्य भारत प्रांत में 610 स्थानों पर गूंजेगा वंदे मातरम्, शुक्रवार सुबह 11 बजे सामूहिक गायन एक साल में 72 हजार से ज्यादा ई-वाहन बढ़े प्रदेश में ई-वाहनों के पंजीयन के आंकड़े भी बदलाव की रफ्तार दिखाते हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 58,524 ई-वाहन पंजीकृत हुए थे। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1,31,158 हो गई। यानी एक साल में 72,634 ज्यादा ई-वाहन पंजीकृत हुए और वृद्धि करीब 124 प्रतिशत रही। दोपहिया ई-वाहनों का पंजीयन 54,108 से बढ़कर 1,06,136 हो गया। तिपहिया वाहनों में यह संख्या 3,061 से बढ़कर 19,003 और चार पहिया ई-वाहनों में 1,284 से बढ़कर 3,486 हो गई। ये भी पढ़ें-भाजपा का नया दांव: दतिया में नरोत्तम को किया किनारे, स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी को कमान पांच शहरों को बनाया ईवी मॉडल सिटी ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट में भी इन शहरों को प्रदेश के ईवी इकोसिस्टम से जुड़े प्रमुख प्रयासों के रूप में दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण, ग्रीन जोन और ई-मोबिलिटी कॉरिडोर पर फोकस किया जा रहा है। इसके साथ ही ईवी तरंग पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य ई-वाहनों से जुड़ी मंजूरियों और नीतिगत सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना है। ये भी पढ़ें-एमपी: 79 की उम्र में दिग्विजय की 950 किमी पदयात्रा, रोज 8 किमी की प्रैक्टिस; 20 अक्तूबर से शुरुआत, जानिए वजह चार्जिंग नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा ई-वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम किया गया है। राज्य के अनुसार 2026 में प्रदेश में 1,780 चार्जिंग स्टेशन संचालित हैं। इनमें 650 स्टेशन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और 1,130 निजी चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटरों के हैं। ये भी पढ़ें-मध्यप्रदेश भाजपा में बदलाव: त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब कुमार देव प्रभारी, सांसद रेखा वर्मा सह प्रभारी बनीं मार्च से सितंबर तक एक लाख से ज्यादा ई-वाहन प्रदेश में चालू वित्तीय अवधि में भी ई-वाहनों का इस्तेमाल बढ़ता दिखाई दे रहा है। मार्च से सितंबर 2026 के बीच 1,00,064 ई-वाहन पंजीकृत हुए। राज्य के आंकड़ों के अनुसार यह इस अवधि में पंजीकृत सभी वाहनों का 10.1 प्रतिशत है। यानी मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन अब केवल नीति और प्रोत्साहन तक सीमित नहीं हैं। वाहन पंजीयन, चार्जिंग नेटवर्क और मॉडल ईवी सिटी जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ ई-मोबिलिटी का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 24, 2026, 07:42 IST
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