Rohtak News: बार-बार दवा छिड़कने की जरूरत नहीं, 10 मिनट में पता चलेगा फसल में कितना बचा कीटनाशक
करिश्मा रंगारोहतक। अगर किसान को यह पहले ही पता चल जाए कि फसल में कीटनाशक का असर अभी बाकी है या खत्म हो चुका है, तो वह बेवजह दोबारा दवा का छिड़काव नहीं करेगा। इससे उसकी लागत भी बचेगी और फसल, मिट्टी व पर्यावरण पर भी कम असर पड़ेगा। इसी सोच को नई तकनीक में बदलते हुए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के बॉटनी विभाग की शोधार्थी रहीं ज्योति यादव ने प्रो. विनीता हुड्डा के मार्गदर्शन में दो अहम शोध किए हैं। पहले शोध में नैनो तकनीक आधारित ऐसा मैलाथियॉन विकसित किया गया है जो कम मात्रा में लंबे समय तक असर करता है। दूसरे शोध में एक स्मार्ट इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर तैयार किया गया है जो महज 10 मिनट में फसल और सब्जियों में बचे मैलाथियॉन की मात्रा बता सकता है। दोनों शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशितहुए हैं और इन्हें सुरक्षित व टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संवादकम दवा, लंबा असर…किसानों की लागत घटाने की उम्मीदशोध के दौरान सामान्य मैलाथियॉन को बायोडिग्रेडेबल नैनो कणों में तैयार किया गया। इससे कीटनाशक एक साथ खत्म होने के बजाय धीरे-धीरे निकलता है और 6 से 13 दिन तक प्रभावी रहता है। परीक्षणों में सफेद मक्खी जैसे प्रमुख कीटों पर 96 से 98 प्रतिशत तक नियंत्रण मिला। खास बात यह रही कि सामान्य मैलाथियॉन की तुलना में कम मात्रा में ही बेहतर परिणाम मिले। साथ ही, पौधों की पत्तियों, जड़ों और तनों पर दुष्प्रभाव भी कम देखा गया। यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो किसानों को कम दवा खरीदनी पड़ेगी, बार-बार छिड़काव नहीं करना होगा और दवा, मजदूरी व ईंधन पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।अब लैब का लंबा इंतजार नहीं, 10 मिनट में मिलेगी रिपोर्टफसल में कीटनाशक का अवशेष जांचने के लिए अब लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं रहेगी। शोध में विकसित स्मार्ट इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर केवल 10 मिनट में यह बता देता है कि फसल या सब्जी में मैलाथियॉन कितना बचा है। इसकी संवेदनशीलता 0.01 पीपीएम तक है, यानी बहुत कम मात्रा का भी पता लगा सकता है। वास्तविक सब्जियों के नमूनों पर परीक्षण में इसने 93 से 99 प्रतिशत तक सटीक परिणाम दिए। इससे किसानों के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा एजेंसियों और कृषि प्रयोगशालाओं को भी तेजी से जांच करने में मदद मिल सकेगी।दोनों शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशितनैनो मैलाथियॉन पर आधारित शोध विले की पॉलीमर्स फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज और स्मार्ट बायोसेंसर पर शोध एल्सवियर की प्रोसेस बायोकेमिस्ट्री में प्रकाशितहुआ है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कम लागत, बेहतर उत्पादन, सुरक्षित खाद्य गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 05, 2026, 03:52 IST
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