Siddharthnagar News: फर्जी दस्तावेज से शिक्षक बनने वालों की खैर नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी सिद्धार्थनगर। विभागीय गठजोड़ के जरिये बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज से नौकरी करने वाले शिक्षक एक बार फिर जांच की जद में आएंगे। अभी फर्जीवाड़ा की जांच थमी नहीं है कि हाईकोर्ट की ओर से देवरिया के एक फर्जीवाड़े की सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी जनपद में नियुक्त हुए सहायक अध्यापकों के दस्तावेज के जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने छह माह में जांच पूरी करके कार्रवाई के साथ वेतन वापस करने और विभागीय संलिप्तता उजागर होने पर संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई करने का आदेश दिया। इससे अब तक जांच की आंच से बचे फर्जीवाड़ा करने वालोंं की सांसें अटक गई हैं। क्योंकि, जांच का दायरा बढ़ा तो अभी बड़ी संख्या में फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा। एसटीएफ की ओर से की गई कार्रवाई में शिक्षा माफिया सहित 100 से अधिक फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई और माफिया की संपत्ति की कुर्की भी हो चुकी हैैं। वर्ष 2017-18 में जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल किए जाने की शिकायत मिली। मामले की यूपी एसटीएफ ने जांच शुरू की तो कई फर्जीवाड़े पकड़े गए और बर्खास्तगी करने के साथ फर्जीवाड़ा के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई और कुछ आरोपियों को जेल भी भेजा गया। अब तक 100 से अधिक शिक्षक पकड़ में आ चुके हैं। एसटीएफ की टीम की ओर से अभी भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में एक शिक्षक संदिग्ध पाया गया। इसके संबंध में एसटीएफ की ओर से अभिलेख मांगा गया और जांच की जा रही है। इसके अलावा भनवापुर ब्लॉक में ही आठ अतिरिक्त शिक्षकों की भर्ती और नियुक्ति का मामला पकड़ में आया तो फर्जी शिक्षक भाग गए। इस मामले में बीईओ की तहरीर पर त्रिलोकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करके जांच की जा रही है। जनपद में फर्जीवाड़े की घटना थम नहीं रही है। इसी बीच हाईकोर्ट की ओर से देवरिया से जुड़े फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने के मामले में सुनवाई के दौरान बड़ा आदेश देते हुए प्रदेश भर में सभी शिक्षकों के शैक्षणिक व प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों की छह माह के भीतर अनिवार्य जांच का आदेश दिया गया है। स
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 04, 2026, 23:06 IST
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