Bilaspur News: अब सुई-धागा मुक्त होगा मोतियाबिंद मरीजों की आंखों का ऑपरेशन

एम्स बिलासपुर में बुजुर्गों को मिलेगी मोतियाबिंद के दर्द से आजादीसंस्थान ने शुरू की दो अत्याधुनिक फेको मशीनों की खरीद प्रक्रियासंवाद न्यूज एजेंसीबिलासपुर। हिमाचल के बुजुर्गों और मोतियाबिंद के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब आंखों के ऑपरेशन के नाम से लगने वाले सुई वाले इंजेक्शन और टांकों के डर से मुक्ति मिल जाएगी। एम्स बिलासपुर अपने नेत्र विज्ञान विभाग को अत्याधुनिक फेको तकनीक से लैस करने जा रहा है। इसके लिए संस्थान दो नई फेको इमल्सीफिकेशन मशीनें (वी2) खरीदने जा रहा है, जिससे मोतियाबिंद की सर्जरी अब पूरी तरह से सुरक्षित, सटीक और दर्द रहित होगी।खास बात यह है कि इस तकनीक में आंख में मात्र दो मिलीमीटर का सूक्ष्म छेद किया जाता है, जो सर्जरी के बाद अपने आप ही भर जाता है। इसके लिए मरीजों को अब निजी अस्पतालों में 40 से 50 हजार रुपये की भारी-भरकम फीस नहीं चुकानी होगी। आमतौर पर बुजुर्ग ऑपरेशन के बाद होने वाली चुभन और हफ्तों तक आंखों पर बंधी रहने वाली भारी पट्टी से डरते हैं। लेकिन एम्स की यह नई मशीन इस पूरी प्रक्रिया को बदल देगी। इस तकनीक में आंखों को सुन्न करने के लिए इंजेक्शन के बजाय खास आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। छोटा चीरा होने के कारण टांका लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे भविष्य में आंख में खिंचाव या पानी आने की समस्या नहीं रहती। ऑपरेशन के महज कुछ घंटों बाद मरीज घर जा सकेगा और अगले दिन से ही अखबार पढ़ने या टीवी देखने जैसे सामान्य काम कर पाएगा। पहाड़ी राज्य होने के नाते मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और ऊना जैसे जिलों से आने वाले मरीजों के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर काटना मुश्किल होता है। यह एक डे-केयर सुविधा होगी, जिसमें मरीज सुबह आकर दोपहर तक छुट्टी पा सकेगा। इससे तीमारदारों के रहने-खाने का खर्च और समय दोनों की बचत होगी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 09, 2026, 19:18 IST
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