Jhansi News: एक मौत, दो जांच रिपोर्ट और उठे कई सवाल
अमर उजाला ब्यूरो झांसी। एक साल पहले गर्भस्थ बच्ची की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की दो जांच रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आया है। ललितपुर सीएमओ की अध्यक्षता में हुई जांच रिपोर्ट ने जिला स्वास्थ्य विभाग की पहली जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने डॉ. शैली साहू के ओम चाइल्ड एवं मैटरनिटी पॉली क्लीनिक का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।पाल कॉलोनी निवासी भूपेंद्र कुशवाहा ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत कर आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी आरती कुशवाहा साढ़े आठ माह की गर्भवती थीं। 28 मई 2025 को रूटीन चेकअप के लिए वह डॉ. शैली साहू के पास गए थे। डॉक्टर की सलाह पर जांच और अल्ट्रासाउंड कराया गया। 31 मई को वह पत्नी को लेकर दोबारा क्लीनिक पहुंचे।आरोप है कि खून की कमी बताकर इंजेक्शन लगाने की बात कही गई और मिशन कंपाउंड स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। वहां नर्सिंग स्टाफ ने ड्रिप में इंजेक्शन मिलाकर चढ़ाना शुरू किया। शिकायत के अनुसार कुछ ही देर बाद आरती की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति खराब होने पर उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां से एक अन्य नर्सिंग होम भर्ती कराया। ऑपरेशन के बाद गर्भ से मृत बच्ची निकली गई।मामले में तत्कालीन सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने जुलाई 2025 में डॉ. आरएस भदौरिया, डॉ. नेहा जोशी और डॉ. उत्सव राज की तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे। कमेटी ने 19 जुलाई को रिपोर्ट सौंपी थी।पहली रिपोर्ट में कहा गया था कि गर्भवती का हीमोग्लोबिन 5.7 ग्राम था। इस पर डॉ. शैली साहू ने एफसीएम इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। उसे एक होम में भर्ती कराया गया, जहां इंजेक्शन लगाया गया। रिपोर्ट में कहा गया था कि इंजेक्शन के बाद मरीज की हालत में सुधार आया, बाद में स्थिति बिगड़ी।जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर भूपेंद्र कुशवाहा ने मंडलायुक्त से शिकायत की। मंडलायुक्त के निर्देश पर सीएमओ ललितपुर डॉ. इम्तियाज अहमद की अध्यक्षता में दोबारा जांच कमेटी गठित की गई। इसमें उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अमित तिवारी और चिकित्साधिकारी डॉ. सुनीता दिवाकर शामिल रहे।कमेटी ने 23 मई 2026 को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि 5.7 ग्राम हीमोग्लोबिन वाली आठ माह की गर्भवती हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में थी। अल्ट्रासाउंड के अनुसार गर्भ आठ माह का था और प्रसव कभी भी हो सकता था। ऐसी स्थिति में एफसीएम इंजेक्शन लगाने से अत्यधिक खून की कमी का समाधान नहीं हो सकता था और हाई रिस्क को टाला नहीं जा सकता था।रिपोर्ट में कहा गया कि डॉ. शैली साहू विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, बावजूद इसके क्लीनिक में आपातकालीन व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। नई जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने सीएमओ को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद सीएमओ ने ओम चाइल्ड एवं मैटरनिटी पॉली क्लीनिक का पंजीकरण निरस्त कर दिया।ललितपुर सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने कार्रवाई के आदेश दिए। इसके क्रम में ओम चाइल्ड एवं मैटरनिटी पॉली क्लीनिक का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।- डॉ. शिशिर पुरी, सीएमओ, झांसीजिले की पहली जांच टीम पर उठे सवाल- पहली जांच में कहा गया था कि इंजेक्शन के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ, जबकि नई रिपोर्ट में इंजेक्शन लगाने के बाद स्थिति बिगड़ने की बात कही गई है।- आठवें माह में 5.7 ग्राम हीमोग्लोबिन होने पर एफसीएम इंजेक्शन से अधिक लाभ की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। ऐसी स्थिति में खून चढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठे हैं।- हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले में क्लीनिक की आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच जरूरी थी, जिसका पहली रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 20, 2026, 02:46 IST
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