Prayagraj News: शिक्षा के अधिकार के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि वंचित वर्ग के अभिभावक तकनीक के अभाव में ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ हैं तो उनका मैन्युअल (ऑफलाइन) आवेदन स्वीकार करना बेसिक शिक्षा अधिकारी का कर्तव्य है।यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने प्रयागराज के बालक ख्वाजा अशर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ता के पिता ने ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थता जताते हुए मैन्युअल आवेदन दिया था, जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए स्वीकार करने से इन्कार कर दिया कि अब केवल ऑनलाइन प्रक्रिया ही मान्य है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल ऑनलाइन पोर्टल का सहारा लेना संविधान के अनुच्छेद 21-ए और शिक्षा के अधिकार कानून की मूल भावना के विपरीत है। यह गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित कर सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान हजारों बच्चों ने स्कूल आवंटित होने के बावजूद प्रवेश नहीं लिया। साथ ही कई स्कूलों में 25 प्रतिशत कोटे के मुकाबले केवल एक या दो बच्चों को ही प्रवेश दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उन अभिभावकों के लिए एक एसओपी तैयार करे जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, ताकि उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के माध्यम से सुविधा मिल सके। अदालत ने प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 25, 2026, 06:05 IST
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