मन की बात : जम्मू-कश्मीर में 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां ज्ञान भारतम से जुड़ीं, 70 हजार तक पहुंचने का लक्ष्य

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की पहल पर पूरे देश में दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में भी 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित हो चुकी हैं। इन्हें ज्ञान भारतम पोर्टल और एप से जोड़ा गया है। जून 2026 तक चलने वाले अभियान के तहत 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों को संरक्षित करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम एप से जोड़ने का आह्वावन किया। कहा कि इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम एप है। आपके पास कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है तो उसकी फोटो ज्ञान भारतम एप पर जरूर साझा करें। प्रधानमंत्री के इस आह्वान को पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से वृहद प्रयास चल रहा है। अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय के नेतृत्व में अभी तक प्रदेश में चिह्नित करीब 33 हजार में से 30 हजार से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित कर एप पर लोड की जा चुकी हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय का फारसी विभाग प्रमुख भूमिका निभा रहा है। बेचने या गिरवी रखने वालों को उचित दाम देने का प्रस्तावअभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय के निदेशक केके सिद्धा ने अभी इसी माह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार में पांडुलिपियों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने की ट्रेनिंग प्रतिभागियों को दी थी। उन्होंने बताया था कि श्री वैष्णो माता श्राइन बोर्ड भी पांडुलिपि प्रदान कर रहा है। संबंधित अधिकारी गांव-गांव जाकर इसकी तलाश करेंगे। बेचने और गिरवी रखने वालों को उचित रकम भी देने का प्रस्ताव है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 29, 2026, 15:57 IST
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