Pakistan: ईरान-अमेरिका समझौते पर पाकिस्तान बेचैन, खुद को बताने लगा शांति दूत; शहबाज बोले- जल्द खत्म हो तनाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर खुद को शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश करता दिख रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान और अमेरिका के बीच जल्द शांति समझौता होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्थिक संकट और क्षेत्रीय दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में लंबे तनाव का असर उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर सीधे पड़ सकता है। आखिर शहबाज शरीफ ने ईरान से क्या कहा ईद-उल-अजहा के मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के राष्ट्रपति के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान शहबाज ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ऐसा समझौता होगा, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता आए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान हमेशा ईरान के साथ खड़ा रहेगा। पाकिस्तान प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात और पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की। क्या पाकिस्तान खुद को जरूरत से ज्यादा अहम दिखाने की कोशिश कर रहा बातचीत के दौरान पाकिस्तान ने अपने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल मुनीर की भूमिका को भी प्रमुखता से सामने रखा। ईरान ने भी कथित तौर पर आसिम मुनीर की शांति प्रयासों के लिए तारीफ की। लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में अपनी कूटनीतिक मौजूदगी दिखाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकी छवि से जूझ रहा है। ऐसे में वह पश्चिम एशिया संकट को अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहता है। पाकिस्तान को पश्चिम एशिया संकट से डर क्यों पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर पड़ रहा है। पाकिस्तान पहले ही महंगाई, विदेशी कर्ज और डॉलर संकट से जूझ रहा है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यही वजह है कि इस्लामाबाद लगातार युद्धविराम और समझौते की बात कर रहा है। पाकिस्तान को डर है कि लंबे संकट से उसकी आयात व्यवस्था और ऊर्जा जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। क्या ईरान भी पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहा ईरान इस समय अमेरिका और इस्राइल के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में वह पड़ोसी मुस्लिम देशों का समर्थन दिखाकर खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहता है। इसी कारण ईरान ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे देशों के सहयोग का जिक्र किया। हालांकि क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान की भूमिका सीमित मानी जाती है और बड़े फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी कम ही दिखाई देती है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है। लेकिन पाकिस्तान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह क्षेत्रीय शांति का समर्थक है। हालांकि सभी जानते हैं कि पाकिस्तान ऐसे मौकों पर अक्सर खुद को जरूरत से ज्यादा अहम दिखाने की कोशिश करता है, जबकि उसकी अपनी आंतरिक स्थिति कमजोर बनी हुई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 28, 2026, 02:45 IST
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