Chandigarh-Haryana News: पत्नी और नाबालिग बेटे की हत्या, पैरामिलिट्री जवान की उम्रकैद बरकरार

- हाईकोर्ट ने पानी में शवों के अपघटन पर मेडिकल सिद्धांतों का दिया हवाला- महेंद्रगढ़ में पत्नी और बेटे की हत्या के मामले में करार दिया गया था दोषीचंडीगढ़। वर्ष 2015 में महेंद्रगढ़ में अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे की हत्या के दोषी पैरामिलिट्री जवान की उम्रकैद की सजा को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। अदालत ने पानी में डाले गए शवों के अपघटन से संबंधित मेडिकल सिद्धांतों पर भरोसा करते हुए दोषसिद्धि को सही ठहराया।एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) का कांस्टेबल धर्मेंद्र इस मामले में दोषी है। अभियोजन के अनुसार उसने पत्नी रीना और बेटे की हत्या करने के बाद उनके शवों के साथ ईंटें बांधकर नहर में फेंक दिया था। धर्मेंद्र ने हाईकोर्ट में दायर अपील में दलील दी थी कि पानी में डूबे रहने के कारण शवों की सही पहचान संभव नहीं थी और अभियोजन मृत्यु के समय, चोटों और पोस्टमार्टम के बीच सुसंगत समयसीमा स्थापित करने में विफल रहा है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ठंडे पानी में डूबे शवों का अपघटन हवा में पड़े शवों की तुलना में काफी धीमी गति से होता है। पीठ ने रिकॉर्ड किया कि पानी में शव के अपघटन में सामान्यतः दोगुना समय लग सकता है।अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा कि ठंडे पानी में गहराई में, वजन के साथ और कपड़ों से ढके शवों में सड़न की प्रक्रिया काफी देर से शुरू होती है। चूंकि दोनों शव इसी अवस्था में बरामद हुए थे, इसलिए उनमें अत्यधिक सड़न का अभाव अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करता। कोर्ट ने माना कि पोस्टमार्टम से 5 से 10 दिन पहले मृत्यु होने संबंधी मेडिकल राय पूरी तरह फॉरेंसिक रूप से सही है। आरोपी 14 दिसंबर 2015 को, जिस दिन हत्याएं हुईं, अपनी दिल्ली स्थित एसएसबी यूनिट से बिना किसी स्पष्टीकरण के अनुपस्थित था।धर्मेंद्र ने अपनी पत्नी रीना की गर्दन पर गंभीर चोटें पहुंचाकर हत्या की और बेटे को रस्सी से गला घोंटकर मार डाला। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए शवों को नहर में फेंक दिया। अभियोजन के अनुसार रीना ने अपने मायके वालों से कई बार एक लाख रुपये की मांग को लेकर उत्पीड़न की शिकायत की थी। मृत्यु से कुछ समय पहले उसने अपने पिता को चेतावनी दी थी कि उसकी जान को खतरा है जब परिजन उसके घर पहुंचे तो मकान खून से सना हुआ और सुनसान मिला। धर्मेंद्र ने कभी अपने परिवार के लापता होने की सूचना भी नहीं दी। बाद में पुलिस ने नहर से ईंटों से बंधे दोनों शव बरामद किए। इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत की ओर से दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 17, 2026, 19:50 IST
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