Unmute Bharat: '10 साल में 10 बड़ी टेक कंपनियां बनाना लक्ष्य', प्रो. करंदीकर ने बताया कैसे नई ताकत बनेगा भारत?
किसी भी देश का भविष्य उसकी प्रयोगशालाओं में लिखा जाता है। भारत अब तकनीक का सिर्फ उपभोक्ता बने रहने के बजाय अपनी तकनीक गढ़ने की दिशा में बढ़ रहा है। 5जी के स्वदेशी टेक्नोलॉजी स्टैक से भारतीय भाषाओं पर आधारित एआई मॉडल और क्वांटम संचार तक देश ने तेजी से प्रगति की है। अब सरकार का जोर शोध और नवाचार में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर है। अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य और पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और तकनीक की भूमिका पर रोडमैप सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का शोध, विकास और नवाचार कोष सही तरीके से इस्तेमाल हुआ तो अगले 10 वर्षों में भारत से तकनीक के क्षेत्र में कम से कम 10 बड़ी कंपनियां उभर सकती हैं। इससे भारत से एलन मस्क या स्टीव जॉब्स जैसी तकनीकी प्रतिभा के उभरने की जमीन भी तैयार होगी। सूचना क्रांति के साथ सूचना युद्ध का खतरा करंदीकर के मुताबिक मोबाइल, इंटरनेट और एआई ने सूचना का लोकतंत्रीकरण किया है। आज मोबाइल से कोई भी व्यक्ति सूचना हासिल करने के साथ उसका निर्माता भी बन सकता है। लेकिन सूचना की इस बाढ़ में सबसे बड़ी चुनौती उसकी विश्वसनीयता है। एआई के जरिये प्रामाणिक सूचना को भी तोड़ा-मरोड़ा और नरेटिव बदला जा सकता है। ऐसे में एथिकल एआई, एआई गवर्नेंस और डेटा गवर्नेंस जरूरी हैं। 5जी से भारत जेन तक बढ़ी स्वदेशी क्षमता भारत 4जी और 5जी की स्वदेशी तकनीक विकसित कर चुका है। एआई में आईआईटी बॉम्बे की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने भारतजेन विकसित किया है, जबकि स्टार्टअप सर्वम का मॉडल भारतीय भाषाओं और भारतीय डेटा पर आधारित है। क्वांटम संचार में क्यूएनयू लैब्स जैसे स्टार्टअप भी वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित कर रहे हैं। शोध-नवाचार में निजी निवेश बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती करंदीकर के मुताबिक, भारत का आरएंडडी खर्च जीडीपी का 0.84% पहुंच गया है और अगले दो वर्षों में 1% होने का अनुमान है। अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश 2-3 प्रतिशत खर्च करते हैं। बड़ी समस्या यह है कि विकसित देशों में आरएंडडी का 70-80 प्रतिशत खर्च निजी क्षेत्र उठाता है, जबकि भारत में सरकार 50-60 प्रतिशत और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 30-40 प्रतिशत है। निजी कंपनियां अत्याधुनिक शोध से इसलिए कतराती हैं क्योंकि इसमें छह-सात साल लग सकते हैं और बाजार में सफलता की गारंटी नहीं होती। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के शोध, विकास और नवाचार कोष की घोषणा की है। 10 बड़ी कंपनियों की सफलता का पैमाना करंदीकर के मुताबिक इस कोष की सफलता का पैमाना सिर्फ पैसा खर्च होना नहीं, बल्कि अगले 10 वर्षों में तकनीक के क्षेत्र में 10 बड़ी कंपनियों का उभरना होगा। ये कंपनियां एआई, ड्रोन, क्वांटम, दूरसंचार, ड्रग डिस्कवरी और सेल-जीन थेरेपी जैसे क्षेत्रों में हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी युवा प्रतिभा और मजबूत तकनीकी संस्थान हैं। इसलिए बड़ी तकनीकी कंपनियां खड़ी करने के लिए परिस्थितियां अब पहले से ज्यादा अनुकूल हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 12, 2026, 02:48 IST
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