चुनावी लहर के गणित ने बदलीं सरकारें: मुद्दे बने सत्ता की सीढ़ी, दलों के लिए मुद्दों से जुड़ी लहर रहती असरदार
पंजाब में चुनाव के दौरान पारंपरिक सियासत और समीकरणों से ज्यादा राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी लहर और मतदाताओं का मूड असरदार रहता है। पिछले करीब तीन दशकों में हुए विधानसभा चुनावों का रुझान देखें तो चुनावी लहर के गणित ने सूबे में सरकारें बदलीं और मुद्दों ने सत्ता की सीढ़ी बनाई। साल 1997 और 2022 के विधानसभा चुनावों में इसका सबसे ज्यादा लाभ शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी को मिला। दोनों ने पंजाब के चुनावी इतिहास में रिकॉर्ड कायम किए। साल 1997 में पहली बार किसी गठबंधन ने 117 में से कुल 93 सीटें जीती थीं। इनमें अकाली दल को 75 और भाजपा को 18 सीटें मिली थीं। इसी तरह, साल 2022 में सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ आम आदमी पार्टी ने वादों और मुद्दों के जरिये सूबे में बदलाव की ऐसी लहर खड़ी की, जिसने पहली बार पार्टी को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाया और भगवंत सिंह मान मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में भी रिकॉर्ड बना।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 11, 2026, 10:19 IST
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