अमेरिकी मेडिकल लैब पर साइबर हमला: मरीजों के रिकॉर्ड तक पहुंचे हैकर्स, निशाने पर क्यों हेल्थकेयर सेक्टर?
दुनियाभर में साइबर सुरक्षा को लेकर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। अब अमेरिकी लैबोरेटरी ऑपरेटर क्वेस्ट डायग्नोस्टिक्स (Quest Diagnostics) एक बड़े साइबर हमले का शिकार हुई है। गुरुवार को कंपनी ने खुलासा किया कि उसके क्वानम एलएसएम (Quanum LSM) सिस्टम में किसी ने अनधिकृत तरीके से घुसपैठ की है। बता दें कि यह वही सिस्टम है जिसका इस्तेमाल कंपनी के क्लाइंट्स टेस्ट का ऑर्डर देने, नतीजे प्राप्त करने और उन्हें देखने के लिए करते हैं। मरीजों के किन जानकारियों तक पहुंचे हैकर्स कंपनी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, इस हैकिंग का पूरा दायरा क्या है, इसकी जांच अभी चल रही है। हालांकि, शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि हैकर्स ने मरीजों के कुछ गोपनीय रिकॉर्ड्स तक अपनी पहुंच बना ली थी। बुधवार को इस साइबर सेंधमारी की भनक लगते ही क्वेस्ट डायग्नोस्टिक्स ने तुरंत एक्शन लिया। कंपनी ने अपनी एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि उसने मामले की गंभीरता को देखते हुए संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा से जुड़े रिस्पॉन्स प्रोसिजर को भी लागू कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि इस साइबर हमले के कारण कंपनी के बिजनेस या दैनिक ऑपरेशन्स पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। काम पहले की तरह ही सुचारू रूप से चल रहा है। हेल्थकेयर सेक्टर पर लगातार मंडरा रहा खतरा यह कोई पहला मामला नहीं है। क्वेस्ट डायग्नोस्टिक्स पर हुआ यह साइबर अटैक उस कड़ी का हिस्सा है, जिसके तहत लगातार हेल्थकेयर सेक्टर को निशाना बनाया जा रहा है। हाल के दिनों में मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कई नामी कंपनियों जैसे एबॉट, स्ट्राइकर, मेडट्रॉनिक और बोस्टन साइंटिफिक को भी ऐसे ही साइबर अटैक्स का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, मशहूर दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क और ड्रग-डिलीवरी उपकरण सप्लाई करने वाली कंपनी वेस्ट फार्मास्युटिकल सर्विसेज को भी हैकर्स ने अपना निशाना बनाया है। यह साफ दर्शाता है कि मेडिकल और हेल्थकेयर डेटा अब साइबर अपराधियों का नया पसंदीदा टारगेट बन चुका है। लैब पर पहले भी हुए हैं साइबर हमले मरीजों के डेटा लीक होने का यह पहला मामला नहीं है। क्वेस्ट डायग्नोस्टिक्स पर पहले भी कई बार सइबर हमले हो चुके हैं। साल 2016 में कंपनी ने बताया था कि एक ऑनलाइन डेटा ब्रीच में करीब 34,000 लोगों की जानकारी लीक हो गई थी। इसमें लैब टेस्ट के नतीजे और संपर्क से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इसके बाद 2019 में कंपनी के करीब 1.19 करोड़ मरीजों की कुछ निजी जानकारी प्रभावित हुई थी। उस मामले में सेंध लैब के सिस्टम में नहीं, बल्कि उसकी बिलिंग और कर्ज वसूली से जुड़ी सेवा देने वाली कंपनी के सिस्टम में लगी थी। मेडिकल सेक्टर साइबर अपराधियों के निशाने पर क्यों मेडिकल लैब पर साइबर हमले होने की एक बड़ी वजह मरीजों का निजी डेटा है। लैब के पास लोगों के नाम, फोन नंबर, मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट और दूसरी संवेदनशील जानकारी होती है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी, पहचान की चोरी या डेटा बेचने के लिए कर सकते हैं। कुछ हमलावर लैब के कंप्यूटर सिस्टम को लॉक करके फिरौती मांगते हैं या चोरी की गई जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी देते हैं। इसके अलावा, पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड, समय पर सिक्योरिटी अपडेट न होना और कर्मचारियों को भेजे गए फर्जी ईमेल भी साइबर हमले का रास्ता बन सकते हैं। मेडिकल लैब अब टेस्ट ऑर्डर, रिपोर्ट और बिलिंग जैसे कामों के लिए डिजिटल सिस्टम और बाहरी सॉफ्टवेयर कंपनियों पर निर्भर हैं। ऐसे में लैब या उसके किसी सेवा प्रदाता के सिस्टम में सेंध लगने से मरीजों की जानकारी खतरे में पड़ सकती है और कामकाज भी प्रभावित हो सकता है। क्वेस्ट डायग्नोस्टिक्स के मामले में भी अभी यह साफ नहीं है कि कितने मरीज प्रभावित हुए और कौन-सी जानकारी तक पहुंच बनाई गई। कंपनी के मुताबिक, इस घटना का पीएचपी प्रोग्रामिंग भाषा में मिली सुरक्षा खामी से संबंध नहीं है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 23, 2026, 13:12 IST
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