Social Media Poetry: तुमने देखा एक नज़र
तुमने देखा एक नज़र, तो हम मुस्कुराने लगे ख्वाब जो दिल में थे शब्द बन अधरों पर आने लगे। जिंदगी की कड़ी धूप में हम जो थे हांफते खड़े, हम पर सावन की घटाएं मेहरबान हो बरसने लगे। ज़ख्म हो गई थी ये ज़िंदगी तेरे आने के बगैर, तुमने नजरें इनायत जो की ये गीत बन कर गाने लगे। दुश्वारियों की बारिशों में भीगते जो हम थे खड़े, आप थे जो आए और छतरी बन हमें बचाने लगे। ~ राकेश धर द्विवेदी हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें। लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएपचैनल से https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 30, 2026, 18:33 IST
Social Media Poetry: तुमने देखा एक नज़र #Kavya #ViralKavya #RakeshDharDwivedi #RakeshDharDwivediKiKavita #TumneDekhEkNazar #SubahSamachar
