रामकुमार कृषक की कविता: तुम्हारे नाम की हो रही है लूट हे राम !

तुम्हारे नाम की हो रही है लूट हे राम ! तुम्हारे नाम को जप रहा है झूठ हे राम ! तुम्हारे नाम से भर रहे हैं पेट हे राम ! तुम्हारे नाम पर ठग रहे हैं सेठ हे राम ! तुम्हारे नाम पर सजे हुए हैं बाज़ार हे राम ! तुम्हारे नाम पर जम गया है ब्योपार हे राम ! तुम्हारे नाम पर डाकू भी सन्त हे राम ! तुम्हारे नाम की महिमा है अनन्त हे राम ! हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2026, 20:07 IST
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