यहां भी है रिटर्न सुरक्षा के साथ: स्मॉलकैप और मिडकैप एसेट्स को लेकर निवेशकों के मन में अनिश्चितता

दिल्ली में रहने वाले रमेश मित्तल ने पिछले साल रिटायर होने पर फंड का एक बड़ा हिस्सा स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंड में लगाया था। शुरुआती कुछ महीनों में तो अच्छा मुनाफा दिखा। लेकिन हाल की उथल-पुथल में मुनाफा साफ होने लगा। इस गिरावट ने रमेश की रातों की नींद उड़ा दी। अब वे सोच रहे हैं कि काश उन्होंने अपना यह पैसा पीपीएफ या सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी सरकारी लघु बचत योजनाओं में लगाया होता, जहां लॉक-इन पीरियड भले ही है, लेकिन पूंजी डूबने का डर पूरी तरह शून्य है। लॉक-इन पीरियड रखता है अनुशासन में जब शेयर बाजार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक मंदी के कारण गोता लगाने लगता है, तब निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की तरफ बढ़ना लाजिमी है। ऐसे दौर में पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी लघु बचत योजनाएं एक अचूक सुरक्षा कवच की भूमिका निभाती हैं। कई लोग इनके लंबे लॉक-इन पीरियड को एक नकारात्मक पहलू के रूप में देखते हैं, लेकिन इसे व्यावहारिक अनुशासन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो आपको बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर घबराहट में गलत निर्णय लेने से रोकता है। लघु बचत योजनाओं के तीन सबसे बड़े सुरक्षा स्तंभ हैं: संपूर्ण संप्रभु सुरक्षा: बाजार आधारित म्यूचुअल फंड्स में सुरक्षा की सीमा फंड मैनेजर की कुशलता पर टिकी होती है, लेकिन लघु बचत योजनाओं में आपकी पूंजी और रिटर्न दोनों की 100% गारंटी भारत सरकार देती है। यहां डिफॉल्ट का जोखिम पूरी तरह शून्य है। अस्थिरता से बचाव: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से इन योजनाओं पर कोई आंच नहीं आती। इनका रिटर्न निश्चित होता है और हर तिमाही पर ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है। कड़ा लॉक-इन पीरियड निवेशकों को बाजार की गिरावट में घबराकर पैसा निकालने से रोकता है, जिससे दीर्घकालिक लक्ष्य सुरक्षित रहते हैं। लघु बचत योजनाएं किसकेलिए सही लघु बचत योजनाएं हर किसी के लिए नहीं हैं: जोखिम से बचने वाले निवेशक: जो लोग शांति की नींद सोना चाहते हैं और अपने मूलधन पर एक रुपये का भी नुकसान बर्दाश्त नहीं कर सकते। सेवानिवृत्त: जिन्हें नियमित, सुरक्षित और निश्चित आय की आवश्यकता है। विशिष्ट लक्ष्य: जिनके घर में बेटियां हैं और वे उनकी शिक्षा या विवाह के लिए सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं। उच्च आय वर्ग के लोग: जो पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80सी का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं। टैक्स और रिटर्न के मोर्चे पर अन्य फिक्स्ड-इनकम उत्पादों से तुलना मापदंड सरकारी लघु बचत योजनाएं बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) डेट म्यूचुअल फंड मौजूदा ब्याज दर / रिटर्न 7.1% से 8.2% (योजना के अनुसार, त्रैमासिक संशोधित) 6.5% से 7.7% (बैंक और अवधि के अनुसार) बाजार आधारित (अनुमानित 7.0% से 7.8%) सुरक्षा का स्तर सर्वोच्च (सरकार की गारंटी) ₹5 लाख तक सुरक्षित (DICGC बीमा) क्रेडिट और ब्याज दर जोखिम के अधीन धारा 80C के तहत टैक्स छूट हां, PPF, SSY, NSC और SCSS जैसी योजनाओं में उपलब्ध केवल 5-वर्षीय टैक्स सेवर FD पर उपलब्ध नहीं, कोई टैक्स छूट उपलब्ध नहीं परिपक्वता पर टैक्स PPF और SSY जैसी योजनाओं में पूरी तरह टैक्स-फ्री (EEE) आपके टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह टैक्स योग्य (TDS लागू) निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स योग्य तरलता (Liquidity) कम से मध्यम (5 से 15 साल तक का लॉक-इन) उच्च (समय से पहले निकासी पर मामूली पेनल्टी) अत्यधिक उच्च (बिना लॉक-इन के कभी भी निकासी संभव) वित्तीय नियंत्रण के लिए अनुशासन जरूरी अति-उत्साह में आकर पूरे पैसे को स्मॉलकैप या इक्विटी में डालना जितना खतरनाक है, अत्यधिक डर में आकर 15 साल के लिए पूरे पैसे को लघु बचत योजनाओं में लॉक कर देना भी उतना ही अतार्किक है। अगले 5 से 15 साल के लक्ष्यों के लिए एक ऐसा डाइवर्सिफाइड बास्केट तैयार करें, जहां पीपीएफ/एसएसवाई आपकी पूंजी को सुरक्षित रखें, और एक मजबूत फ्लेक्सीकैप या मिडकैप फंड की एसआईपी आपकी संपत्ति को महंगाई से आगे बढ़ाए। - अनूप भैया,संस्थापक, मनीहनी फाइनेंशियल सर्विसेस क्या 5 से 15 साल के लिए यहां पैसा लगाना समझदारी है यदि आपके पास ऐसा पैसा है, जिसकी जरूरत अगले 5 से 15 वर्षों तक नहीं है, तो उसे पूरी तरह बाजार से दूर रखना समझदारी नहीं, बल्कि महंगाई का जोखिम मोल लेना है। क्रय शक्ति का नुकसान: यदि भारत में वास्तविक महंगाई दर 6 से 7 फीसदी के आसपास है, और आपकी लघु बचत योजना आपको 7.1 से 8.2 फीसदी का रिटर्न दे रही है, तो टैक्स के बाद आपका वास्तविक रिटर्न लगभग शून्य या 1 फीसदी होगा। आपका पैसा बढ़ेगा तो सही, लेकिन उसकी क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी। लंबी अवधि में बाजार का ट्रैक रिकॉर्ड: 10 से 15 साल की अवधि में, इक्विटी मार्केट्स (लार्जकैप या डाइवर्सिफाइड फ्लेक्सीकैप बास्केट) ने ऐतिहासिक रूप से महंगाई को बड़े अंतर से पछाड़ते हुए 12 से 14 फीसदी तक का कंपाउंडेड रिटर्न दिया है। इसलिए समझदारी पूरे पैसे को किसी एक जगह लगाने में नहीं है। आपको एक संतुलित बास्केट रणनीति अपनानी चाहिए। 50-60% पैसा लघु बचत में सुरक्षा के लिए रखें, और बाकी 40% अनुशासित एसआईपी या एसटीपी के जरिये इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में डालें ताकि लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण हो सके।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 29, 2026, 05:12 IST
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