Dausa: जिले में बर्तन बैंक योजना पर सवाल, 30 लाख खर्च लेकिन अब तक आय शून्य
ग्रामीणों को सस्ते और सुगम तरीके से बर्तन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में शुरू की गई बर्तन बैंक योजना फिलहाल खुद सवालों के घेरे में है। जिले की 30 ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक खोलने के लिए सरकार द्वारा करीब 30 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक इससे एक रुपये की भी आय नहीं हो सकी है। पंचायती राज विभाग ने शुरु किया था प्रोग्राम जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की बजट घोषणा 2025-26 की पालना में पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायत स्तर पर बर्तन बैंक स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसके तहत प्रत्येक पंचायत को राज्य वित्त आयोग मद से एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। जिला स्तरीय समिति ने विकास अधिकारियों की अनुशंसा पर 30 ग्राम पंचायतों का चयन किया। इसके बाद बर्तन क्रय कर उन्हें आजीविका से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को संचालन के लिए सौंपा गया। कई जगहों पर औपचारिकता बनकर रह गई स्कीम योजना का उद्देश्य यह था कि गांवों में छोटे-बड़े कार्यक्रमों के लिए लोगों को टेंट व्यवसायियों और निजी बर्तन आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर न रहना पड़े, लेकिन हकीकत यह है कि कई स्थानों पर बर्तन बैंक या तो शुरू ही नहीं हो पाए हैं या फिर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। तीन रुपये प्रति सेट, फिर भी नहीं मिल रहे ग्राहक सरकार ने ग्रामीणों को ध्यान में रखते हुए बर्तन बैंक से बर्तन किराए की दर बेहद कम रखी है। प्रति सेट केवल 3 रुपये निर्धारित किए गए हैं। एक सेट में एक प्लेट, तीन कटोरी, एक चम्मच और एक गिलास सहित कुल छह स्टील बर्तन शामिल हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 400 सेट खरीदे गए हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों में न तो इस योजना को लेकर पर्याप्त जागरूकता है और न ही भरोसा। योजना के तहत बर्तन क्रय, रखरखाव, किराया वसूली और सत्यापन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों को दी गई है, लेकिन न तो कोई स्पष्ट मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया और न ही जवाबदेही तय की गई। 'पर्यावरण संरक्षण भी उद्देश्य' योजना के बार में बताते हुए दौसा जिला परिषद के सीईओ बिरदीचंद गंगवाल ने बताया कि बर्तन बैंक की स्थापना के पीछे सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। गांवों में शादी-विवाह और अन्य समारोहों में प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए यह योजना शुरू की गई। हालांकि फिलहाल ग्रामीणों को बर्तन बैंक की जानकारी ही नहीं है। शादी-विवाह का सीजन शुरू होने वाला है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अब बर्तन किराए पर जाने लगेंगे। ये भी पढ़ें:जयपुर में होगी शादी लेकिन, वायरल होते ही बदला रूट, बड़ौदा से गायब हुआ प्रिया सेठ का परिवार यहां स्थापित किए गए हैं बर्तन बैंक विकास अधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर जिला स्तरीय समिति ने 30 ग्राम पंचायतों एवं स्वयं सहायता समूहों का चयन एवं अनुमोदन किया है। बर्तन बैंक बांदीकुई क्षेत्र के पामाड़ी, अरनिया, ऊनबड़ा गांव, आभानेरी, बसवा के झारवालों की ढाणी, करनावर, लालसोट के श्यामपुरा कलां, बगड़ी, श्रीरामपुरा, टोड़ा ठेकला, नांगल राजावतान क्षेत्र के नांगल राजावतान और आलूदा, महवा के गाजीपुर, खेड़ला बुजुर्ग, सांथा, पावटा, लवाण के बनियाना और शेरसिंह रजवास, बैजूपाड़ा के बैजूपाड़ा और पुंदरपाड़ा, रामगढ़ पचवारा के अमराबाद, हेमल्यावाला और सलेमपुरा, दौसा के सैंथल, बापी और कुंडल, सिकराय के मानपुर और गीजगढ़, सिकंदरा के सिकंदरा और गंडरावा तथा टोरड़ा क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 22, 2026, 17:37 IST
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