क्या ITR से तय होगी दुर्घटना पीड़ित की आय?: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तय किए नए दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे में समानता लाने के मकसद से एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने बुधवार को दिशा-निर्देश तय किए कि अदालतें मृत या घायल व्यक्ति की सालाना आय का हिसाब आयकर रिटर्न (आईटीआर) के आधार पर कैसे लगाएंगी। वेतनभोगी और स्व-रोजगार वालों के लिए क्या होंगे अलग नियम शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वेतन पाने वाले व्यक्तियों के लिए केवल पिछले छह वर्षों का आईटीआर उनकी वार्षिक आय दिखाने के लिए पर्याप्त होगा। वहीं, खुद का काम करने वाले (स्व-रोजगार) व्यक्तियों के लिए पिछले तीन वर्षों तक के आईटीआर में दिखी औसत आय को सामान्य रूप से आधार माना जाएगा। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा, मोटर वाहन अधिनियम के तहत वार्षिक आय की गणना के लिए कोई एक तय नियम नहीं हो सकता। लेकिन उन्होंने मुआवजे के लिए आईटीआर के आधार पर आकलन करते समय वेतनभोगी कर्मचारियों और स्व-रोजगार करने वाले व्यक्तियों के बीच स्पष्ट अंतर तय किया। फैसला लिखने वाले जज जस्टिस करोल ने कहा, इस कोर्ट की सुविचारित राय में किसी मृत व्यक्ति/दावेदार की वार्षिक आय की गठना के लिए कोई कठोर और निश्चित नियम नहीं हो सकता। आईटीआर एक वैधानिक दस्तावेज है और मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के उद्देश्य से किसी की आय का आकलन करने में यह एक अहम आधार है। ये भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- चार्जशीट की प्रति नहीं मिलने मात्र से डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं फैसले में वरिष्ठ वकील जेआर मिधा की दलील को स्वीकार किया गया, जिसमें कहा गया था कि वार्षिक आय के आकलन के मामले में वेतन पाने वाले व्यक्तियों और स्व-रोजगार करने वाले लोगों के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। अदालतों के अलग-अलग तरीकों पर शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा देशभर की अदालतों की ओर से अपनाए जा रहे अलग-अलग तरीकों को देखते हुए पीठ ने यह भी कहा कि कुछ अदालतें केवल सबसे हालिया आईटीआर पर भरोसा करती हैं, जबकि कुछ पिछले वर्षों के आईटीआर की औसत आय निकालती हैं, जिससे अलग-अलग और असंगत मुआवजे दिए जाते हैं। कोर्ट ने कहा, हमारी राय में वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए केवल पिछले वर्ष का आईटीआर ही उनकी वार्षिक आय दिखाने के लिए पर्याप्त होगा। पिछले वर्ष को इसलिए लिया जाता है, क्योंकि पदोन्नति का असर अक्सर उसी वर्ष के आईटीआर में दिखता है। अगर हाल ही में पदोन्नति या वेतन बढ़ा हो तो क्या होगा हालांकि, यदि दुर्घटना से ठीक पहले किसी व्यक्ति को पदोन्नति या वेतन वृद्धि मिली हो और वह नवीनतम आईटीआर में पूरी तरह न दिखी हो, तो अदालतें पदोन्नति पत्र और अन्य वित्तीय दस्तावेज भी देख सकती हैं। स्व-रोजगार और व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए पीठ ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के आईटीआर में दिखाई गई आय का औसत सामान्य रूप से वार्षिक आय तय करने का आधार होना चाहिए, क्योंकि इनकी आय बदलती रहती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 01, 2026, 16:16 IST
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