सिमटने लगा बाग-बगीचे का दायरा: चिरईगांव में आम, अमरूद और फालसा का उत्पादन भी हुआ कम; किसान परेशान
अमरूद, आम और फालसा उत्पादन में पहचान बनाने वाला क्षेत्र में बाग-बगीचे का दायरा अब सिमटने लगा है। 15 साल में 70 फीसदी रकबा घटा है।शहरीकरण के कारण जमीन की कमी और लागत ज्यादा लगने से किसान बागवानी कम जमीन में कर रहे हैं। चिरईगांव ब्लॉक के किसान आंवला, बेल, मिर्च और कटहल से अचार, मुरब्बा और जैम बनाकर देश के कोने-कोने में बेचते हैं। बीते कुछ वर्षों में अमरूद के पेड़ों में उकठा रोग और फालसा की खेती के लिए मजदूरों की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। चिरईगांव के पूर्व प्रधान धनंजय मौर्य बताते हैं कि क्षेत्र में बीते 15 साल में अमरूद की खेती केवल 30 प्रतिशत ही बची है। साल 1962 में चिरईगांव में 709 एकड़ में बाग थे। शहरीकरण के चलते इनका रकबा घटकर आधे से भी कम रह गया है। चिरईगांव में नींबू, सीताफल, गुलाब, पपीता, केला, कटहल, आंवला, बेल, शरीफा, करौंदा, बेर, शहतूत, इमली, जामुन, नाशपाती, लीची, महुआ और अंगूर का उत्पादन खूब होता था।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 16, 2025, 07:28 IST
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