SEBI Chief: 'कमोडिटी बाजारों को चाहिए घरेलू वास्तविकताओं वाले स्थानीय मानक', सेबी अध्यक्ष ने की वकालत
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कमोडिटी बाजारों के पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े बदलाव की बात कही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों पर अत्यधिक निर्भरता समाप्त करने पर जोर दिया। पांडे ने कहा कि घरेलू बाजार के मूलभूत सिद्धांतों के साथ स्थानीय मानकों को विकसित करना आवश्यक है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 में उन्होंने यह बात कही। पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि सेबी का लक्ष्य वैश्विक मानकों से भारतीय माल वितरण मानकों को आगे बढ़ाना है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय भारतीय मानक बनाना है। ये मानक घरेलू कमोडिटी बाजार का वैश्विक स्तर पर विस्तार करेंगे। उन्होंने बताया कि एक सफल कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार वास्तविक अर्थव्यवस्था के जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में सक्षम होता है। भारत के कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार के अगले चरण को केवल कारोबार या उसकी उपयोगिता के आधार पर नहीं देखना चाहिए। इसे इस आधार पर भी देखना चाहिए कि यह बाजार वास्तविक अर्थव्यवस्था को कीमतों का पता लगाने और जोखिम प्रबंधन में कितनी मदद करता है। सेबी अध्यक्ष ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। इन प्राथमिकताओं में बाजार की दक्षता बढ़ाना और भागीदारी को व्यापक करना शामिल है। भौतिक बाजार के साथ संबंधों को मजबूत करना और बाजार शिक्षा में निवेश करना भी महत्वपूर्ण है। भागीदारी और लागत में सुधार कैसे होगा सेबी अध्यक्ष ने कहा कि पहली प्राथमिकता भागीदारी को आसान और अधिक कुशल बनाना है। जोखिम नियंत्रणों को बनाए रखते हुए अनावश्यक लागत कम करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए स्थिति सीमा और हाशिया ढांचे को सुव्यवस्थित किया जाएगा। स्थिति सीमा पर परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके दिशानिर्देश जल्द ही पेश किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वस्तुओं का लेनदेन करने वाले प्रतिभागियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर जीएसटी परिषद के साथ भी बातचीत की जाएगी। यह कदम बाजार में अधिक पारदर्शिता लाएगा। प्रतिभागियों का दायरा कैसे बढ़ेगा दूसरी प्राथमिकता प्रतिभागियों का दायरा बढ़ाना है। इसमें वाणिज्यिक और संस्थागत प्रतिभागियों को बढ़ावा देना शामिल है। इससे बाजार में तरलता, मूल्य निर्धारण और जोखिम बचाव की प्रभावशीलता मजबूत होगी। सेबी कमोडिटी सूचकांकों और भौतिक रूप से निर्धारित गैर-कृषि समझौतों तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की व्यापक पहुंच की जांच कर रहा है। यह सुनिश्चित ढांचे के जरिये किया जाएगा। यह पहल बाजार को और अधिक समावेशी बनाएगी। तीसरा, भौतिक बाजार के साथ संबंधों को मजबूत करना है। हमने कृषि उत्पादों के लिए चरणबद्ध भौतिक निपटान प्रणाली पर परामर्श पूरा कर लिया है। बाजार शिक्षा और जागरूकता क्यों जरूरी है इस प्रणाली का उद्देश्य वितरण प्रणाली के साथ तरलता को बढ़ाने में मदद करना है। साथ ही, डेरिवेटिव और भौतिक बाजार के बीच प्रभावी तालमेल के लिए भंडारण, परीक्षण, गुणवत्ता मानक और विश्वसनीय वितरण प्रणाली जरूरी है। उन्होंने चौथी प्राथमिकता के बारे में बोलते हुए कहा कि बाजार शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। बाजार शिक्षा और अनुसंधान की क्षमता बढ़ाना जरूरी है। ऐसे कार्यक्रमों का निर्माण करने की आवश्यकता है जो अनुसंधान और शिक्षा को उन हितधारकों तक पहुंचाएं जिनको इसकी जरूरत है। सेबी अध्यक्ष ने 'प्रोजेक्ट जागरुक' के बारे में भी जानकारी दी। इस अभियान के तहत किसानों, पारिवारिक संगठनों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, जोखिम बचाव करने वालों और अन्य बाजार उपयोगकर्ताओं के बीच कमोडिटी बाजार के बारे में जानकारी और जागरूकता बढ़ाई जाएगी। यह प्रयास बाजार की समझ को गहरा करेगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Aug 12, 2026, 18:16 IST
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