Sehore news: सूर्यवंशी समाज ने संजोए रखी है लोक गीत परंपरा, होली में पांच दिन तक करते हैं रंग-गुलाल-फाग गायन
जहां एक ओर आधुनिकता के इस दौर में पारंपरिक संस्कृति, लोक परंपराएं और मान्यताएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, वहीं कुछ लोग इन्हें जीवित रखने के लिए प्रयासरत हैं। सूर्यवंशी समाज ने अपनी लोकगीत परंपरा को संजोए रखते हुए इसे जीवंत बनाए रखा है। होली जैसे लोकपर्व में लोकगीतों का विशेष महत्व होता है, लेकिन समय के साथ इनके स्वर धीमे पड़ते जा रहे हैं। फिर भी, कुछ समुदाय ऐसे हैं, जो अपनी पुरानी परंपराओं को निभा रहे हैं। सीहोर नगर के फ्रीगंज क्षेत्र में आज भी बुंदेलखंडी लोकगीतों की मधुर गूंज सुनाई देती है। ढोलक, नगड़िया, झांझ, मंजीरा और खंजड़ी की धुनों के साथ फाग गायन की टोलियां बैठ रही हैं, जिससे होली उत्सव की शुरुआत हो गई है। सूर्यवंशी अहिरवार समाज के लोग पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को सहेजे हुए हैं। खास बात यह है कि युवा पीढ़ी भी बुजुर्गों से इस परंपरा को सीख रही है और इसे आगे बढ़ा रही है। पांच दिनों तक चलता है फाग गायन क्षेत्र में पूरे पांच दिन तक रंग-गुलाल के साथ ही फाग गायन और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम चलते हैं। इन लोकगीतों में रामायण, महाभारत, देवी गीत, भगवान शिव और गणेश के प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। इसके अलावा, श्रृंगार, विरह और करुण रस से भरपूर लोकगीत भी गाए जाते हैं। सूर्यवंशी समाज के लोग फाग, राई, स्वांग और ढिमरयाई शैली में गायन करते हैं, जो इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। ये भी पढ़ें-Ujjain News:उज्जैन की अनोखी होली, चकमक पत्थर से दहन, तीन हजार वर्ष पुरानी परंपरा, राजा भर्तृहरि से कनेक्शन गमी वाले परिवारों के घर जाकर रंग डालने की परंपरा इस समाज की एक अनूठी परंपरा यह भी है कि होली पर सबसे पहले शोक संतप्त परिवारों के घर जाकर रंग डाला जाता है। समाज की गैर (समूह) निकाली जाती है, जो उन परिवारों के घर जाती है, जिन्होंने हाल ही में किसी अपने को खोया है। यह परंपरा उन्हें शोक से बाहर निकालकर होली के रंगों में रंगने की भावना से की जाती है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी नगर में फाग गायन मंडलियां पूरे पांच दिनों तक पारंपरिक लोकगायन करती रहेंगी। इस सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में सूर्यवंशी समाज का योगदान सराहनीय है। ये भी पढ़ें-बागेश्वर धाम में फूलों की होली के साथ तीन दिनी महोत्सव का आगाज, धीरेंद्र शास्त्री ने ये कहा सीहोर। होली को लेकर शुरू हो गई लोकगीत परंपरा सीहोर। होली को लेकर शुरू हो गई लोकगीत परंपरा
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 13, 2025, 18:31 IST
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