Gift Deed: दादी को बेसहारा छोड़ने पर गिफ्ट डीड निरस्त, ट्रिब्यूनल का बड़ा आदेश

महाराष्ट्र के लातूर में दादी को बेसहारा छोड़ने पर वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल ने उनके पोते-परपोते के नाम किया गया गिफ्ट डीड रद्द कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बुजुर्गों की सेवा सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अनिवार्य कानूनी शर्त है। 89 वर्षीय हौसाबाई लहाड़े ने अपनी 7.5 एकड़ कृषि भूमि रजिस्टर्ड दानपत्र के जरिये पोते और परपोते के नाम करवाई थी। जमीन हाथ में आते ही दोनों ने बुजुर्ग हौसाबाई को बेसहारा छोड़ दिया। अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान हौसाबाई ने हिम्मत नहीं हारी और ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल के आदेश पर दोनों का नाम राजस्व रिकॉर्ड से भी हटा दिया गया है। क्या होती है गिफ्ट डीड गिफ्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्वेच्छा से दूसरे व्यक्ति को स्थानांतरित कर सकता है। यह कानूनी दस्तावेज संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के तहत आता है। यह वसीयत से अलग है और इसमें संपत्ति हस्तांतरण के बदले कोई धनराशि नहीं ली जाती और यह पूरी तरह से प्रेम और स्नेह के आधार पर की जाती है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 10, 2026, 04:44 IST
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