The Bonus Market Update: सेंसेक्स 1600 अंक से अधिक गिरा; निफ्टी 2,400 के नीचे फिसला; इंडिया VIX 14% बढ़ा

पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट ने मंगलवार को ग्लोबल वित्तीय बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले और उसके जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (जहाँ से दुनिया की पांचवीं सदी ऊर्जा गुजरती है) में टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद निवेशकों में भारी घबराहट है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 517 अंक यानी लगभग 2.06 फीसदी टूटकर 24,344 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं, सेंसेक्स भी करीब 1,700 अंक या 2.17 फीसदी गिरकर 78,596 के स्तर तक आ गया। आइए समझते हैं बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और निवेशक क्या रणनीति अपना रहे हैं। बाजार में बिकवाली क्यों हो रही है आमतौर पर संकट के समय निवेशक इक्विटी (शेयर) बेचकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और बॉन्ड) की तरफ भागते हैं। लेकिन इस बार बाजार का बर्ताव बिल्कुल अलग है। शेयर, बॉन्ड और सुरक्षित माना जाने वाला सोना, तीनों एक साथ गिर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशियाके घटनाक्रम ने निवेशकों की स्थिति को हिला कर रख दिया है। 36 साउथ कैपिटल एडवाइजर्स के जॉर्ज एडकॉक के अनुसार, बाजार में अत्यधिक पोजीशनिंग और कम अस्थिरता का दौर अचानक पलट गया है, जिससे पूरे पोर्टफोलियो में 'वैल्यू-एट-रिस्क' शॉक देखा जा रहा है। आसान शब्दों में, जब कई सेक्टर्स में एक साथ घबराहट वाली बिकवाली होती है, तो जोखिम कम करने वाले पारंपरिक तरीके काम नहीं करते। बाजार की बिकवाली मेंकिनसे बढ़ावा मिल रहा क्रूड और डॉलर में उछाल: निवेशकों की पहली पसंद अब सिर्फ अमेरिकी डॉलर और तेल हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल में लगभग 7% की भारी तेजी आई है। ग्लोबल इक्विटी क्रैश: वॉल स्ट्रीट के प्रमुख इंडेक्स (एसएंडपी500) 2% से अधिक गिर गए, जो दो महीने का सबसे निचला स्तर है। सोने में गिरावट: सोमवार को चार सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने वाला सोना 4% गिर गया है। स्टेट स्ट्रीट के आकाश दोशी के अनुसार, मार्जिन कॉल को चुकाने और लिक्विडिटी (नगदी) जुटाने के लिए निवेशक सोने में मुनाफावसूली कर रहे हैं। बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिका की दो-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 3.599% हो गई है, जो जनवरी के अंत के बाद सबसे अधिक है। निवेशक किस ओर रुख कर रहे हैं इस वैश्विक तनाव के बीच निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर नगदी जमा कर रहे हैं। LSEG लिपर डेटा के अनुसार, ग्लोबल मनी मार्केट फंड्स (शॉर्ट-टर्म कैश इंस्ट्रूमेंट्स) में 47.9 बिलियन डॉलर का भारी निवेश हुआ है, जो 17 फरवरी के बाद सबसे अधिक है। दूसरी ओर, निवेशकों ने ग्लोबल इक्विटी फंड्स से 9.1 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं।जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट के डेविड केली का कहना है कि यह क्वालिटी की ओर उड़ान का दिलचस्प रूप है, जहां मांग सीधे शॉर्ट-टर्म कैश के लिए बढ़ रही है। भविष्य के लिए क्या रुझान है जानकारों का मानना है कि वर्तमान में बाजार पूरी तरह से 'शॉक' की स्थिति में है। महंगाई बढ़ाने वाले तेल के दामों में उछाल और युद्ध की अनिश्चितता ने निवेशकों को डरा दिया है। हालांकि, जेपी मॉर्गन के केली चेतावनी देते हैं कि डॉलर की यह तेजी लंबे समय तक नहीं टिक सकती। उनका मानना है कि "युद्ध झटके और खौफ से शुरू होते हैं, लेकिन दलदल में खत्म होते हैं, जो डॉलर के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है"। जब तक मध्य पूर्व में तनाव के बादल नहीं छंटते, शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी आशंका है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 04, 2026, 06:04 IST
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