Gorakhpur News: बुजुर्गों के इलाज में संवेदनशीलता और व्यक्तिगत देखभाल जरूरी

-दीर्घायु 2026 के दूसरे दिन डिमेंशिया, तंत्रिका विकार, सार्कोपीनिया और रजोनिवृत्ति पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार- आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी दीर्घायु 2026 के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने वृद्धावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके समग्र प्रबंधन पर मंथन किया।श्रीबीएम कांकेनवाड़ी आयुर्वेद महाविद्यालय, बेलगावी के प्राचार्य एवं चिकित्सा निदेशक प्रो. डॉ. सुहास कुमार शेट्टी ने डिमेंशिया प्रबंधन में समयबद्ध पहचान और पारिवारिक सहयोग को अहम बताया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के उपचार में संवेदनशीलता, धैर्य और व्यक्तिगत देखभाल जरूरी है। वहीं, डॉ. बीआरकेआर राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, हैदराबाद के सेवानिवृत्त आचार्य डॉ. एम. श्रीनिवासुलु ने तंत्रिका विकारों के उपचार में वात संतुलन और रोगी की प्रकृति के अनुरूप चिकित्सा पर जोर दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का घटता द्रव्यमान कार्यक्षमता प्रभावित करता है। उन्होंने संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को महत्वपूर्ण बताया। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने की जरूरत बताई।एम्स की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आराधना सिंह ने रजोनिवृत्ति से जुड़ी शारीरिक, हार्मोनल और मानसिक समस्याओं पर चर्चा की। वहीं, डॉ. संजय श्रीवास्तव ने वृद्धजनों में शल्य चिकित्सा संबंधी जटिलताएं घटाने के लिए बेहतर पोषण, पूर्व तैयारी और पुनर्वास के साथ आयुर्वेद-आधुनिक चिकित्सा के समन्वय पर बल दिया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 06, 2026, 02:50 IST
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