शरीर, प्राण, मन संयमित करने से होती है साधना : सेठी
- आर्य समाज थापर नगर में रविवारीय सत्संग का हुआ आयोजनमाई सिटी रिपोर्टरमेरठ। आर्य समाज थापरनगर के रविवारीय सत्संग में आध्यात्मिक साधना विषय पर प्रवचन हुए। राजेश सेठी ने कहा कि परमात्मा और जीवात्मा दोनों चेतन सत्ताओं को जानना ही अध्यात्म है। स्वयं को शरीर नहीं बल्कि आत्मा मानकर उसकी उन्नति के लिए प्रयास करना ही अध्यात्म का उद्देश्य है।उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को शरीर, प्राण, मन और बुद्धि प्रदान किए हैं। इन्हें संयमित और व्यवस्थित कर आत्मिक उन्नति के लिए उपयोग करना ही साधना है। इसके लिए शरीर, वाणी और मन का तप करना आवश्यक है। मन की प्रसन्नता, सौम्यता, आवश्यकता से अधिक न बोलना, ब्रह्मचर्य का पालन, आत्मचिंतन और ईश्वर के प्रति समर्पण आध्यात्मिक साधना के प्रमुख मार्ग हैं। कार्यक्रम में प्रीति सेठी, विमल मरवाह, ऋचा सेठी, सुधा सिंह, सुभाष मल्होत्रा, आशा सिंघल, चांद ग्रोवर और रेखा आर्य ने भजन प्रस्तुत किए। आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता और मुकेश कन्नौजिया रहे। संचालन मंत्री मनीष शर्मा ने किया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 01, 2026, 15:38 IST
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