पंजाब में कम जल रही पराली: घटनाओं में 93% से अधिक की गिरावट, मान सरकार ने बढ़ाई मशीनों पर सब्सिडी
पंजाब में पराली प्रबंधन के प्रयासों के बीच पराली जलाने की घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्ष 2022 में पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2025 में घटकर 5,114 रह गईं। वहीं, 2026 में अब तक 474 घटनाएं सामने आई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर 2022 की तुलना में इस वर्ष अब तक घटनाओं में 99 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज हुई है। हालांकि, मौजूदा सीजन के आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आधुनिक कृषि मशीनों पर सब्सिडी दे रही है। राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, 2026 के सीजन में किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन की 21,155 मशीनें खरीदी हैं। इनमें 14,384 सुपर सीडर, 1,721 मल्चर, 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, 1,123 जीरो टिल ड्रिल, 927 बेलिंग मशीनें और 874 स्ट्रॉ रेक शामिल हैं। सरकार व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों पर 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी दे रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन की 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2021 में 8,160 घटनाएं हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 17,067 हो गईं। इसके मुकाबले 2025 में पंजाब में 5,114 और उत्तर प्रदेश में 7,290 घटनाएं दर्ज की गईं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के सीआरईएएमएस कार्यक्रम के 6 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के मुताबिक, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की 287 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें मध्य प्रदेश में 118, पंजाब में 88 और उत्तर प्रदेश में 65 घटनाएं शामिल थीं। बुलेटिन में यह भी बताया गया कि बादलों के कारण कुछ क्षेत्रों में उपग्रह से आग की पहचान प्रभावित हो सकती है। पंजाब में इस गिरावट के पीछे सरकारी सहायता, मशीनों की उपलब्धता और किसानों की भागीदारी को अहम माना जा रहा है। हालांकि, पराली प्रबंधन की चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को समय पर मशीनें उपलब्ध कराने, परिवहन लागत कम करने और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने से इस दिशा में और प्रगति हो सकती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Oct 23, 2026, 12:52 IST
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