Supreme Court on SIR: SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद,TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कर दी ये बड़ी मांग!

TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के निर्णय को बरकरार रखने पर कहा, "SIR मामले में आज जो फैसला दिया गया है, वो बिहार के मामले के लिए लागू होता है.एक और महत्वपूर्ण बात बोली है कि चुनाव आयोग के पास यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन नागरिक है और कौन नहीं है.बंगाल का मामला अलग है। बंगाल के मामले में तार्किक विसंगति के बारे में बोला गया है.बंगाल का मामला बिलकुल अलग है.सुप्रीम ने प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों के संबंध में कई निर्देश दिए हैं सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अदालत के फैसले ने विपक्ष के उस “दुष्प्रचार अभियान” की पोल खोल दी है, जिसके जरिए चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। यह मामला चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक और निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक बताते हुए सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने का पूरा अधिकार है और यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी कदम है। फैसले के बाद भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी चुनाव सुधारों का विरोध कर रहे थे और जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे। भाजपा नेताओं का दावा है कि विपक्ष लगातार ईवीएम, चुनाव आयोग और मतदाता सूची जैसे मुद्दों को लेकर संदेह पैदा करता रहा है ताकि चुनावी हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ा जा सके। भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस का “दुष्प्रचार अभियान” अभी भी जारी है, क्योंकि फैसले के बाद भी विपक्ष न्यायपालिका और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि उनकी चिंताएं जनता के हित में थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने चुनावी राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा इसे अपनी नीतियों और चुनाव आयोग पर भरोसे की जीत बता रही है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में संभावित खामियों की ओर ध्यान दिलाने का प्रयास बता रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर और अधिक गर्मा सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 27, 2026, 17:49 IST
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