सुप्रीम फैसला: मॉरीशस रूट पर निवेश की तस्वीर बदली, वैश्विक निवेशक सतर्क; कर संधियों के दुरुपयोग पर रोक

भारत में विदेशी निवेश के लिए दशकों से इस्तेमाल हो रहे मॉरीशस रूट पर सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले ने वैश्विक निवेश समुदाय में हलचल पैदा कर दी है। अदालत ने अमेरिकी निवेश फर्म टाइगर ग्लोबल के खिलाफ निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल कर बचाने के उद्देश्य से बनाए गए कॉरपोरेट ढांचों को अब कर संधियों के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा। इस फैसले को भारत की कर नीति में ऐसा मोड़ माना जा रहा है, जो भविष्य में विलय-अधिग्रहण और विदेशी निवेश की पूरी संरचना को प्रभावित कर सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जारी अपने एक आदेश में 2018 में टाइगर ग्लोबल द्वारा फ्लिपकार्ट में अपनी 1.6 अरब डॉलर की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने के सौदे को कर योग्य ठहराया। अदालत ने कहा कि टाइगर ग्लोबल ने मॉरीशस स्थित अपनी इकाइयों का इस्तेमाल केवल कर लाभ उठाने के लिए किया और ये इकाइयां वास्तविक कारोबारी गतिविधि के बजाय कंड्युट कंपनियों की तरह काम कर रही थीं। न्यायालय ने इसे अमान्य कर-बचाव व्यवस्था माना। टाइगर ग्लोबल ने पहले आरोपों से इन्कार करते हुए कहा था कि उसने भारत-मॉरीशस कर संधि के तहत उपलब्ध वैध कर लाभों का सही इस्तेमाल किया है, हालांकि फैसले के बाद कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ये भी पढ़ें: पीएम मोदी आज से बंगाल-असम दौरे पर, करोड़ों की देंगे सौगात; इस अहम परियोजना का करेंगे भूमि पूजन मॉरीशस के जरिए निवेश का ऐतिहासिक महत्व पिछले कई दशकों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 180 अरब डॉलर का निवेश मॉरीशस के जरिये भारत में किया है। 1982 में लागू भारत-मॉरीशस कर संधि के तहत यह व्यवस्था बनी थी, जिसमें भारत में शेयर बिक्री से होने वाला पूंजीगत लाभ केवल मॉरीशस में करयोग्य था, जहां कर दर शून्य थी। इसी वजह से मॉरीशस लंबे समय तक भारत में विदेशी निवेश का सबसे बड़ा मार्ग बना रहा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2000 से 2023 के बीच भारत में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का लगभग एक-चौथाई, यानी 171 अरब डॉलर, मॉरीशस से आया। जीएएआर को प्राथमिकता इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य कर-अपवंचन निरोधक नियम यानी जीएएआर को निर्णायक हथियार के रूप में स्थापित किया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी लेन-देन में वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य नहीं है, तो कर अधिकारी संधि लाभों को अस्वीकार कर सकते हैं और कॉरपोरेट ढांचे के पीछे की वास्तविकता को उजागर कर सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब घरेलू कर कानून किसी भी गलत तरीके से लिए गए संधि लाभ पर भारी पड़ेगा। ये भी पढ़ें:गणतंत्र दिवस परेड:कर्तव्य पथ पर दिखेगी युद्ध की व्यूह रचना, पहली बार मूक योद्धाओं का दस्ता होगा शामिल सरकार का पक्षभारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि इस फैसले को निवेश-विरोधी के रूप में देखना गलत है। उनके अनुसार निवेश निर्णय कई कारकों पर आधारित होते हैं और केवल पूंजीगत लाभ कर ही इसका आधार नहीं होता।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 17, 2026, 06:03 IST
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