रिपोर्ट: छात्र आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स का सर्वे, नौ% विद्यार्थियों को आए आत्महत्या के विचार

सुप्रीम कोर्ट की ओर से छात्रों की आत्महत्याओं की जांच के लिए बनाई गई पैनल की देशभर में कराई गई स्टडी में सामने आया कि उच्च शिक्षा संस्थानों के करीब 15 फीसदी छात्रों ने पिछले छह महीनों में ऐसा समय देखा, जब वे बहुत ज्यादा तनाव या परेशानी में थे। वहीं, 9 फीसदी छात्रों ने आत्महत्या के विचार आने की बात कही। 31 अक्तूबर तक आ सकती है टास्क फोर्स की रिपोर्ट पीटीआई को मिले सर्वे के नतीजों को राष्ट्रीय कार्य बल (NTF) की अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है। यह कार्य बल उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए बनाया गया है। इसकी अंतिम रिपोर्ट 31 अक्तूबर तक पेश किए जाने की संभावना है। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी बॉम्बे में दो छात्रों की मौत के बाद छात्र आत्महत्याओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हुई है। इन घटनाओं के बाद इस मुद्दे पर व्यापक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली है। सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों ने लिया हिस्सा सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमिटी ने इस साल की शुरुआत में एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि कई छात्रों को उच्च शिक्षा के दौरान सामाजिक और जातिगत भेदभाव, यौन उत्पीड़न, जेंडर के आधार पर भेदभाव, भाषा की परेशानी और फैकल्टी की ओर से भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में एडमिशन, ग्रेडिंग और अकादमिक मदद में भी भेदभाव की शिकायतों का जिक्र किया गया था। एनटीएफ के स्टूडेंट सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें 67 फीसदी छात्र एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से थे। सर्वे में करीब 34 फीसदी छात्रों ने बताया कि उन्होंने कैंपस में किसी न किसी स्तर पर खुद को बाहरी महसूस किया। "लगभग 15 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने पिछले छह महीनों में ऐसे समय को याद किया जब वे बहुत ज़्यादा परेशान या तनाव में थे, या लगातार कई हफ़्तों तक उदास या एंग्जायटी महसूस कर रहे थे। नौ प्रतिशत ने बताया कि पिछले साल उन्हें अक्सर या बहुत ज़्यादा बार आत्महत्या के विचार आए।" सर्वे में पाया गया कि "56 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उन्हें प्रशासन पर भरोसा है कि वह गंभीर मामलों को निष्पक्ष रूप से संभालेगा, जबकि लगभग 32 प्रतिशत ने कहा कि उनके संस्थान में काउंसलिंग की सुविधा नहीं है।" अधिकारियों के अनुसार, पढ़ाई से जुड़े विकल्पों और नौकरी को लेकर लगातार चिंताएं आम थीं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 29, 2026, 12:59 IST
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