Social Media Poetry: दरवाज़े पर डर बैठा है
दरवाज़े पर डर बैठा है छत पे जाकर घर बैठा है। दीवारों पर साए चिपके, सायों पर पत्थर बैठा है। घास फूँस पर नाग बिराजे, घबराया छप्पर बैठा है। चमकीले ख़ंजर को लेकर, कौन मेरे अंदर बैठा है। पेड़ों के हाथों में गुलेलें झाड़ी में तीतर बैठा है। अंदर तो बैठा बाज़ीगर, बाहर जादूगर बैठा है। ख़ानदान की दस्तारें हैं, सबमें मेरा सर बैठा है। साभार: सुरेन्द्र चतुर्वेदी की फेसबुक वाल से हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 21, 2026, 17:45 IST
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