Kurukshetra News: धर्मक्षेत्र में निकलेगा जगन्नाथ रथ, गूंजेगा हरिनाम और बहेगा भक्ति का सागर
कुरुक्षेत्र। आषाढ़ मास के पावन अवसर पर धर्मक्षेत्र भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर होने जा रहा है। इस्कॉन द्वारा शुक्रवार 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की भव्य वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन होगा। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी यह महोत्सव भक्ति, संस्कृति, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का विराट संगम बनने जा रहा है। हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। जगन्नाथ स्नान यात्रा महोत्सव के बाद अब भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ होंगी। श्रद्धालुओं को दिव्य एवं व्यवस्थित आध्यात्मिक अनुभव कराने के लिए मंदिर परिसर में स्वयंसेवकों और भक्तों द्वारा विभिन्न सेवाएं की जाएंगी। रथ यात्रा के दिन प्रातः से ही श्री कृष्ण अर्जुन मंदिर, ज्योतिसर में विशेष पूजा-अर्चना, हरिनाम संकीर्तन और भगवान जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की भव्य महाआरती की जाएगी। देश-विदेश से आए श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर में आने वाले सभी भक्तों के लिए प्रसाद वितरण एवं भंडारे की व्यवस्था भी रहेगी। सायंकाल भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ ब्रह्मसरोवर क्षेत्र से नगर भ्रमण के लिए निकलेगा। भक्तगण प्रेमपूर्वक रथ की रस्सियां खींचकर भगवान की सेवा करेंगे। पूरे मार्ग में भगवान के स्वागत हेतु विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा स्वागत मंच, पुष्पवर्षा, भोग अर्पण एवं जल सेवा की व्यवस्थाएं की जाएंगी। मंदिर के उपाध्यक्ष मोहन गौरचंद्र ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित भव्य रथ यात्रा में हिस्सा लेने का आग्रह किया। जगन्नाथ रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, समाज को जोड़ने, आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने और भगवान के पवित्र नाम के प्रचार का एक महान उत्सव है। इस्कॉन की पूरी टीम एवं सैकड़ों स्वयंसेवक महोत्सव को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की इस भव्य रथ यात्रा में सम्मिलित होकर उनके दिव्य दर्शन और कृपा का लाभ प्राप्त करें। इस्कॉन के अध्यक्ष साक्षी गोपाल ने बताया कि कुरुक्षेत्र का भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से अत्यंत गहरा आध्यात्मिक संबंध है। वैष्णव आचार्यों द्वारा वर्णित किया गया है कि कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और वृंदावनवासियों के मिलन की दिव्य लीला ही रथ यात्रा की मूल भावना है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा उसी विरह और प्रेम के भाव का उत्सव है, जो भक्त और भगवान के शाश्वत संबंध को दर्शाता है। शास्त्रों में भगवान के रथ-दर्शन और रथ को खींचने की सेवा को अत्यंत शुभ एवं पुण्यदायी बताया गया है। भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर सभी को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं। संवाद
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 19, 2026, 03:45 IST
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