Panipat News: गोपियों की विरह वेदना का किया वर्णन

पानीपत। अंसल के श्री बांके बिहारी ज्ञानेश्वर मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक ने श्री गोपी गीत में गोपियों के विरह की वेदना का वर्णन किया। जीबीएस ट्रस्ट वृंदावन के संस्थापक तेजस्वी दास महाराज में द्वितीय दिवस की कथा में बताया कि भगवान श्रीकृष्ण जब वृंदावन से मथुरा के लिए चले गए तब सारी गोपियां भगवान के विरह में रोने लगी। उन्हें लग रहा था कि सारा ब्रज खाली हो गया है। सारी गलियां खाली लगने लगी और उनके बिरह में गोपियों ने खाना पीना तक छोड़ दिया। उनका किसी भी कार्य में मन नहीं लग रहा था और अपने मन की दशा को समझना बहुत ही मुश्किल हो रहा था उन्होंने बताया कि भगवान की बंसी एक वाद्य यंत्र और एक सखी के रूप में भी है। भगवान की बंसी कोई सामान्य बांस की बंसी नहीं है, उनकी बंसी ललिता विशाखा आदि सखियों की तरह देख सुन भी सकती हैं। उनकी बंसी स्वरूप शक्ति का अंश है। जैसे गिरिराज पर्वत एक पर्वत के रूप में भी है और भगवान के उच्च कोटि दास के रूप में भी हैं। जैसे यमुना गोलोक में एक नदी के रूप में भी हैं और साक्षात यमुना देवी के रूप में भी हैं। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्णा अपने गोलोक धाम से इस जड़ बृज भूमि में आते हैं तो वह चिन्मय बृज के संपर्क में आ जाती हैं और वह भी भगवान का धाम की तरह चिन्मय बृज भूमि बन जाती है। इस मौके पर संजीव मित्तल, पवन जिंदल, मनीष गुप्ता, सुरेश जांगड़ा और राजन पुनियानी मौजूद रहे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 23, 2026, 04:26 IST
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