वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग का सवाल: नया संशोधन बिल अहम कदम, भ्रष्टाचार-अतिक्रमण के दीर्घकालिक मुद्दे हल...
मुस्लिम संगठन और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ क्यों हैं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) देश भर में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे विपक्ष-शासित राज्यों ने विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं, जबकि विपक्षी दल इसके खिलाफ संसद में लामबंद हैं। एआईएमपीएलबी और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि कानून को सांप्रदायिक इरादे से लागू करने की कोशिश की जा रही है। असदुद्दीन ओवैसी ने नए कानून को मुस्लिमों के सीने पर गोलियां दागने और मस्जिदों व दरगाहों को निशाना बनाने जैसा बताया है। हालांकि, अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने नए कानून का स्वागत किया है। दरअसल, वक्फ धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए चल या अचल संपत्ति का स्थायी दान है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा होता है और इसकी देखरेख केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड करते हैं। देश में 37.39 लाख एकड़ में फैली 8.72 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं। हालांकि, केवल 1,088 संपत्तियों के पास वक्फ डीड (ऐसा कानूनी दस्तावेज, जो प्रमाणित करे कि संपत्ति धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए वक्फ के रूप में समर्पित की गई है) पंजीकृत हैं, और 9,279 अन्य के पास स्वामित्व अधिकार स्थापित करने वाले दस्तावेज हैं। वक्फ संपत्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समुदाय के कल्याण हेतु उपयोग करने के लिए होती हैं, लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें राजनीतिक रूप से जुड़े मुस्लिमों ने वक्फ की संपत्तियों को धोखाधड़ी कर हड़प लिया है या फिर उन पर कब्जा कर लिया है। इनसे आम गरीब मुसलमानों, खासकर महिलाओं में चिंता उभरी है। नए वक्फ संशोधन 2024 विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जाए और उनका तयशुदा इस्तेमाल भी हो। यह वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के दीर्घकालिक मुद्दों को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। प्रस्तावित संशोधन पारदर्शिता बढ़ाने, कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित करने और वक्फ बोर्डों के भीतर जवाबदेही और शासन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने पर केंद्रित है। वर्तमान में समावेशिता की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिसकी वजह से हाशिये पर पड़े मुस्लिम समुदायों जैसे-आगाखानी, बोहरा, पिछड़े मुस्लिम, महिलाओं के साथ-साथ गैर-मुस्लिमों को बहुत कम प्रतिनिधित्व मिलता है। यह तब है, जब विभिन्न मुस्लिम संप्रदाय वक्फ संपत्ति दान करते हैं। यही नहीं, महिलाओं, पसमांदा समुदाय और गैर-मुस्लिमों को भी वक्फ शासन से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इससे सवाल उठता है कि क्या वक्फ वाकई वंचित समुदायों और गरीबों के कल्याण व उत्थान के लिए काम कर रहा है, जबकि उन्हें ही इसके लाभों और निर्णय लेने से बाहर रखा गया है। सबसे बड़ी खामी यह है कि वक्फ अधिनियम की धारा 40 वक्फ बोर्ड को उसके द्वारा एकत्र की गई जानकारी के आधार पर किसी भी संपत्ति को, जिसे वह उचित समझे, वक्फ घोषित करने की अनुमति देती है। इससे बड़े विवाद पैदा हो गए हैं, क्योंकि इसे न्यायाधिकरण में तो चुनौती दी जा सकती है, जिसका निर्णय अंतिम होता है, लेकिन कोई भी पीड़ित अदालत में नहीं जा सकता। आंकड़ों की मानें, तो करीब 60,000 वक्फ संपत्तियां अतिक्रमण से ही हथियाई गई हैं। नए कानून के तहत वक्फ डीड अनिवार्य है। सभी संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 से पहले या बाद में वक्फ घोषित की गई कोई भी सरकारी संपत्ति वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी। कलेक्टर रैंक से ऊपर का अधिकारी कानून के अनुसार जांच करेगा कि वक्फ संपत्ति सरकारी है या नहीं। इससे स्वामित्व पर स्पष्टता आएगी और अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा। वक्फ की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कम से कम पांच साल से इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ को संपत्ति दान कर सकते हैं। व्यक्ति को कानूनी रूप से संपत्ति का मालिक होना चाहिए और उसे हस्तांतरित या समर्पित करने में सक्षम होना चाहिए। धारा 40 को खत्म किया गया है। साथ ही, न्यायाधिकरण के फैसले अब अंतिम नहीं होंगे। 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील दायर की जा सकेगी। जिला कलेक्टर पंजीकरण आवेदनों की प्रामाणिकता की पुष्टि करेंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कम से कम दो मुस्लिम महिलाएं और राज्य व संघशासित प्रदेशों के वक्फ बोर्ड में एक-एक सदस्य बोहरा और आगाखानी समुदाय से होना अनिवार्य होगा। पिछड़े वर्ग के मुसलमान भी बोर्ड का हिस्सा होंगे, जिसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। राज्य सरकारें बोहरा और आगाखानी समुदायों के लिए स्वतंत्र वक्फ बोर्ड स्थापित कर सकती हैं। इससे वक्फ संपत्ति प्रबंधन में समावेशिता और विविधता को बढ़ावा मिलेगा। अत: हमें स्पष्ट होना चाहिए कि मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसी लंबे समय से चली आ रही वक्फ संपत्तियों को संरक्षित रखने के स्पष्ट प्रावधान कानून में किए गए हैं। अतीत में कुछ संपत्तियां औपचारिक दस्तावेज के बिना भी धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उनके दीर्घकालिक उपयोग के आधार पर वक्फ बन गईं। हालांकि, यह प्रावधान अब मौजूद नहीं रहेगा, क्योंकि वक्फ डीड अनिवार्य होगी, लेकिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों जैसी वक्फ संपत्तियों को संरक्षण दिया जाएगा, जो इस अधिनियम के लागू होने से पहले या उससे पहले वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं, जब तक कि वे विवादित न हों या सरकारी संपत्ति के रूप में वर्गीकृत न हों। सरकार ने नए कानून का बचाव करते हुए कहा है कि कुछ लोग मुसलमानों में डर पैदा कर उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नया कानून पारदर्शिता बढ़ाने, लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और वक्फ प्रशासन को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। नया कानून वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग को सुनिश्चित करेगा, जिससे गरीबों और महिलाओं को ज्यादा लाभ मिलेगा। यह अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अनाथालय जैसी आवश्यक संस्थाएं भी स्थापित करेगा। सरकार नए कानून के जरिये मुस्लिम समुदाय में विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के सामाजिक हाशिये को खत्म करने और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का भी इरादा रखती है। आखिर निहित स्वार्थ वाले लोग गरीब मुसलमानों के लिए अधिक लाभ के खिलाफ क्यों हैं क्या उन्हें डर है कि अवैध संपत्तियों का उनका आनंद खत्म हो जाएगा
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 02, 2025, 05:27 IST
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