Kangra News: ट्रैवल कंपनी को ब्याज सहित लौटाने होंगे 3.76 लाख रुपये
धर्मशाला। बैंक से ऋण लेकर उसकी अदायगी न करना एक निजी ट्रैवल कंपनी के मालिक को भारी पड़ गया है। धर्मशाला की वरिष्ठ सिविल न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा नेगी की अदालत ने कंपनी को आदेश दिए हैं कि वह एसबीआई का 3,76,806 रुपये का बकाया ऋण 10.75 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाए। यह मामला बैंक द्वारा दायर एक सिविल रिकवरी वाद पर आधारित था। बैंक की ओर से दायर की गई याचिका के अनुसार निजी ट्रैवल कंपनी के मालिक ने 12 नवंबर 2017 को अपने व्यवसाय के संचालन के लिए तीन लाख रुपये की वर्किंग कैपिटल कैश क्रेडिट सीमा के लिए आवेदन किया था। बैंक ने अगले ही दिन 13 नवंबर को 10.85 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से इस ऋण को स्वीकृति प्रदान कर दी थी। ऋण प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी ने बैंक के पक्ष में आवश्यक लोन-कम-हाइपोथिकेशन समझौता और अन्य कानूनी दस्तावेज भी जमा करवाए थे। बैंक का आरोप था कि ऋण सुविधा प्राप्त करने के बाद कंपनी और उसके मालिक ने अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया। समझौते के अनुसार कंपनी को अपने व्यवसाय की दैनिक आय को बैंक के इसी ऋण खाते के माध्यम से संचालित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। बैंक ने कई बार मौखिक आग्रह और लिखित नोटिस भेजे, लेकिन कंपनी अपना ऋण खाता नियमित करने में विफल रही। इसके चलते 28 जनवरी 2019 को बैंक ने इस खाते को एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) घोषित कर दिया। ऋण वसूली के लिए बैंक ने नवंबर 2018 में कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने पर मामला अदालत पहुंचा। दिलचस्प बात यह रही कि मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। अंततः न्यायालय ने बैंक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बकाया राशि ब्याज सहित लौटाने के निर्देश जारी किए।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 14, 2026, 17:22 IST
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