Panipat News: कठिन बात को सहज रूप में लोगों तक पहुंचा रहे रंगमंच के कलाकार
पानीपत। आज विश्व रंगमंच दिवस है। इसी मंच से एक समय में लोगों के मनोरंजन के साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया जाता था। लोग इसे अपने मनोरंजन का साधन मानते थे। रंगमंच पर आज आधुनिकता की धूल जम गई है। सिनेमा के बाद आया सोशल मीडिया पर पूरी से प्रभावी हो गया है। रंगकर्मी इन सबके बीच रंगमंच को जिंदा रखे हुए हैं। समाज के साथ सरकार की तरफ से भी अपेक्षाकृत प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि शुरुआत में रंगमंच से जुड़े लोग धीरे-धीरे रास्ता बदलते चले गए। अब गिने चुने ही रंगकर्मी मैदान में रह गए हैं। नई पीढ़ी में भी कुछ ही आगे आ रहे हैं। टीएजी (थियेटर आर्ट ग्रुप) के संचालक पूंडरी गांव के प्रवेश त्यागी ने बताया कि वे 2004 में साक्षरता मिशन के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक की टीम में शामिल हुए थे। इसके बाद हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति के साथ जुड़े। उस समय करीब एक हजार रंगकर्मी एक साथ काम करते थे। आज 22 साल के सफर में दो या चार रंगकर्मी ही मिल पाते हैं। इसका बड़ा कारण समाज की अनदेखी भी है। पहले सिनेमा ने रंगमंच को पीछे धकेल दिया। अब सोशल मीडिया ने आकर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है। लोगों के पास रंगमंच के लिए समय ही नहीं है। रंगकर्मियों को आजीविका के लिए भजन और कीर्तन मंडली का सहारा लेना पड़ा। धार्मिक आयोजन में रंगमंच अभी बाकी है। प्रवेश त्यागी ने बताया कि रंगमंच से सामाजिक मुद्दों को आसानी के साथ लोगों के सामने रखा जाता सकता है। लोग इन संदेशों को अपना भी लेते हैं। ऐसे में इसका प्रभाव सिनेमा, टीवी और सोशल मीडिया से अधिक है। रंगमंच पर दिमाग ही नहीं शरीर की भी कसरत होती है। एक रंगकर्मी मंच पर बोले जाने वाले विषय को पहले पूरी तरह से तैयार करता है। वह जीवन को अलग नजर से देखता है। एक साल के काम को एक महीने में पूरा करने की हिम्मत रखते हैं। ब्यूरो
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 27, 2026, 03:30 IST
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