Maharajganj News: धान बिक्री के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्यता खत्म
महराजगंज। धान खरीद को रफ्तार देने के लिए शासन ने एक बार फिर धान बिक्री के लिए फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। किसान अब ऑनलाइन पंजीकरण के बाद पहले की तरह धान बिक्री केंद्रों पर धान बेच सकेंगे। इस फैसले से जिले के हजारों किसानों को बड़ी राहत मिली है।जनपद में कुल 3,80,371 किसानों की फार्मर आईडी बननी थी लेकिन अब तक 3,74,243 किसानों ने ही अपनी आईडी बनवाई है। यानी 6,128 किसान अब भी फार्मर रजिस्ट्री से वंचित हैं। अगर फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता बनी रहती तो ये 6,128 किसान सरकारी केंद्र पर धान बिक्री नहीं कर सकते थे। उन्हें औने-पौने दाम पर व्यापारियों को धान बेचना पड़ता। अनिवार्यता समाप्त होने से अब वे भी सरकारी रेट पर धान बेच सकेंगे। धान खरीद एक नवंबर से शुरू चल रही हे और फरवरी 2027 तक चलेगी। इसके लिए जिले में क्रय केंद्र बनाए गए हैं। खाद्य विभाग ने केंद्रों पर बोरा, कांटा, नमी मापक यंत्र और भुगतान की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को धान बिक्री में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। कोइलाडांड़ निवासी शैलेंद्र सिंह का कहना है कि हमारा गांव कोइलाडांड़ चकबंदी में होने से फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही थी। इस कारण सरकारी केंद्र पर धान नहीं बेच पाते थे। व्यापारियों को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता था। अब अनिवार्यता खत्म होने से राहत मिली है। अब हम भी सरकारी रेट पर धान बेच सकेंगे, इससे बहुत खुशी है।गजेंद्र सिंह ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री के चक्कर में हम किसान बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाते थे, फिर भी आईडी नहीं बनती थी। सरकारी खरीद से वंचित होने से नुकसान होता था। शासन ने अनिवार्यता खत्म कर अच्छा फैसला लिया है। अब एक नवंबर से हम भी केंद्र पर आसानी से धान बेच पाएंगे। सिरसिया खास निवासी किसान बैजनाथ ने कहा कि सिरसिया में सोसाइटी केंद्र नहीं होने से हम किसानों को परेशानी होती है। खाद, बीज लेने के लिए नौतनवां जाना पड़ता है। दूरी आठ किलोमीटर है। आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होता है। छोटे किसान और परेशान हैं। सरकार से मांग है कि सिरसिया में केंद्र खोला जाए।किसान विनोद ने कहा कि हमारा गांव सिरसिया गांव है, फिर यहां सोसाइटी केंद्र नहीं बना। हर बार खाद के लिए नौतनवां की दौड़ लगानी पड़ती है। आठ किलोमीटर दूर जाने में आधा दिन खराब हो जाता है। भाड़ा देना पड़ता है। अगर गांव में केंद्र खुल जाए तो सभी किसानों को राहत मिलेगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 08, 2026, 02:30 IST
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