Ratlam Crime: पटाखों की गूंज में हुई थी दंपती और बेटी की हत्या, साढ़े पांच साल बाद तीन आरोपियों को उम्रकैद

करीब साढ़े पांच वर्ष पहले छोटी दीपावली की रात पटाखों की गूंज के बीच दंपती और उनकी बेटी की गोली मारकर की गई सनसनीखेज हत्या के बहुचर्चित मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए तिहरा आजीवन कारावास सुनाया है। मामले के मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड दिलीप देवल की घटना के दो सप्ताह बाद पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी थी। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने आरोपी अनुराग परमार उर्फ बॉबी, गोलू उर्फ गौरव बिलवाल और लाला भाभोर को हत्या, लूट और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी पाते हुए सजा सुनाई। छोटी दीपावली की रात हुआ था तिहरा हत्याकांड घटना 25 नवंबर 2020 की है। छोटी दीपावली के मौके पर शहर में आतिशबाजी और पटाखों का शोर था। इसी दौरान जवाहर नगर मुक्तिधाम के पास स्थित राजीव नगर में बदमाशों ने घर में घुसकर 50 वर्षीय गोविंद सोलंकी, उनकी 45 वर्षीय पत्नी शारदा सोलंकी और 21 वर्षीय पुत्री दिव्या सोलंकी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोपियों ने वारदात के बाद घर से जेवरात भी लूट लिए थे। पटाखों की तेज आवाज के कारण गोलियां चलने की आवाज आसपास के लोगों को सुनाई नहीं दी, जिससे वारदात का पता रातभर नहीं चल सका। नर्स की स्कूटी से खुला था हत्याकांड घटना का खुलासा अगले दिन 26 नवंबर 2020 की सुबह हुआ। मकान के निचले हिस्से में किराए से रहने वाली नर्स ज्वेलिका ने अपनी एक्टिवा स्कूटी घर के बाहर नहीं देखी। स्कूटी के बारे में पूछने वह ऊपर मकान मालिक के घर पहुंची। दरवाजा खोलकर अंदर गई तो गोविंद, शारदा और दिव्या के शव खून से लथपथ पड़े मिले। इसके बाद उसने आसपास के लोगों को सूचना दी। सूचना मिलते ही औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज में आरोपी नर्स की स्कूटी लेकर भागते दिखाई दिए। पढ़ें:कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अवैध हिरासत मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू, इस दिन अगली सुनवाई सीसीटीवी फुटेज से मिली आरोपियों की पहचान फुटेज के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी दिलीप देवल निवासी ग्राम खरेड़ी डूंगरी, जिला दाहोद (गुजरात) तथा अनुराग परमार उर्फ बॉबी निवासी विनोबा नगर, रतलाम की पहचान की। पूछताछ में अनुराग ने अपने साथियों गौरव बिलवाल और लाला भाभोर के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की। इसके बाद दोनों अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी दिलीप देवल की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। 3 दिसंबर 2020 को सूचना मिली कि वह खाचरौद रोड से मिडटाउन कॉलोनी की ओर जा रहा है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से दिलीप देवल की मौके पर ही मौत हो गई। मुठभेड़ में सब-इंस्पेक्टर अय्यूब खान, अनुराग यादव सहित अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बाद में उसके किराए के कमरे से एक देशी पिस्टल, जिंदा कारतूस और सोलंकी परिवार के घर से लूटे गए जेवरात बरामद किए गए थे। अदालत ने सुनाई यह सजा पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तीन अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास तथा धारा 397 के तीन मामलों में भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 450 और 120-बी के तहत प्रत्येक आरोपी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई। तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश दिए हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 20, 2026, 22:57 IST
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