टाइम मशीन: गैस, कतर और तारीख; यानी दोस्ती और दुश्मनी के चौराहे पर खड़ा एक किस्सा
कतर की तरक्की ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। सऊदी अरब, अमीरात, बहरीन और मिस्र ने कतर की नाकाबंदी कर दी। तब कतर ने तुर्किये और ईरान के जरिये व्यापार के रास्ते बनाए। पर अब ईरान ने ही रास लाफान पर हमला कर दिया। ऐसे में, कतर को क्या चाहिए सऊदी और अमीरात से करीबी, अमेरिका से दूरी या ईरान से फिर भूल-चूक लेनी-देनी! एक मिसाइल गिरी, एक मुल्क की दोहरी जिंदगी खत्म हो गई। दोहरा व्यक्तित्व केवल मनुष्यों का ही नहीं, देशों का भी होता है। जमीन के नीचे एक गैस रिजर्वायर-आधा ईरान का, आधा कतर का। ईरान से दोस्ती, अमेरिका के अल उदेद मिलिट्री बेस का मेजबान, हमास का दफ्तर, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल से मतभेद। जमीन के ऊपर है कतर। पश्चिम एशिया की कूटनीति का सबसे जटिल रसायन और जमीन के नीचे छिपी एक ताकत, जो कतर की जान है। यह वही ताकत है, जिसकी कमी की वजह से भारत के उद्योग कराह रहे हैं। प्लास्टिक, रसायन, खाद सबकी कमी होने लगी है। आइए टाइम मशीन में विराजिए, पश्चिम एशिया की जलती गैस फील्ड और रिफाइनरी के ऊपर से उड़ते हुए चलते हैं गैस और कूटनीति के पुराने सफर पर। डरने की बात नहीं है, टाइम मशीन मिसाइलों की जद से ऊपर उड़ती है। बेल्ट बांधिए, निगाह जमाइए टाइम मशीन के गंतव्य पथ पर। हम अभी कतर नहीं, लंदन जा रहे हैं। हमारा रोबो भी बड़ा मजाकिया है, वह बता रहा है कि लंदन में कोई पहली बार हवा को पकड़ने की हिम्मत कर रहा है। यह लंदन है, साल 1823। सामने है रॉयल इंस्टीट्यूशन का तहखाना। यह एक लैब है। वह सामने जो शख्स कांच की बोतलों को सूंघ रहा है, वह हैं माइकल फैराडे। ठीक समझे आप, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स देने वाले फैराडे। यह रसायनशास्त्री यहां हवा को बोतल में बंद करने की जुगत में है। फैराडे गैस को तरल बनाने की कोशिश कर रहा है। यह सिर्फ विज्ञान नहीं है, आज की सोच के खिलाफ एक बगावत है। अंतत: फैराडे ने साबित कर दिया कि अगर तापमान और दबाव को सही तरह से नियंत्रित किया जाए, तो गैस भी पानी बन सकती है। टाइम मशीन के यात्रियों, बस यहीं से तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कहानी शुरू होती है। टाइम मशीन के डायल पर आ रही है अगली तारीख 1959। गंतव्य-लुइसियाना, अमेरिका। बंदरगाह पर खड़े उस जहाज को देखिए-वह एक चमत्कार है, जो एलएनजी को पेट्रोल से ज्यादा बड़ी जरूरत बना देगा। जहाज का नाम है मीथेन पॉयनियर। यह जहाज एक जुगाड़ है-पुराने युद्धपोत को बदलकर बनाया गया। अंदर एल्युमीनियम टैंक, बाहर मोटी इंसुलेशन। इंजीनियरों की टीम में बहस चल रही है कि क्या तापमान बनाए रखा जा सकेगा क्या गैस रास्ते में उड़ जाएगी क्या जहाज सुरक्षित रहेगा एक इंजीनियर ने अपने नोट्स में लिखा कि अगर यह काम कर गया, तो ऊर्जा की दुनिया बदल जाएगी। अगर नहीं, तो हम इतिहास का एक फुटनोट बन कर रह जाएंगे। 17 दिन बाद जहाज इंग्लैंड पहुंचता है। गैस सुरक्षित है। आपकी आंखों के सामने एक क्रांति घट रही है। अब गैस को वहीं जलाना जरूरी नहीं है, जहां वह निकलती है। अब उसे दुनिया के किसी भी कोने में भेजा जा सकता है। इस जहाज का परिवार अगले एक दशक में सीएनएजी टैंकर बनकर दुनिया भर में फैल जाएगा। अब हम चलते हैं कतर की ओर। 1950। कतर के नीचे सागर में फराद की टीम दिख रही है। ये सब मोती गोताखोर हैं। यही कतर की अर्थव्यवस्था है, पर मोतियों की दुनिया खत्म हो रही है। यह 1971 का साल है। टाइम मशीन खाड़ी के ऊपर मंडरा रही है। नीचे सर्वे कर रही है अमेरिकी तेल कंपनी शेल की टीम। डाटा इतना असामान्य है कि अनुभवी भू-वैज्ञानिक भी चौंक जाते हैं। जमीन के नीचे दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है। आधा कतर का, आधा ईरान का। बाद में कतर वाले हिस्से को नॉर्थ डोम व ईरान के हिस्से को साउथ पार्स कहा जाएगा। आज का कतर तो इस खजाने के लिए बहुत छोटा है, सीमित संसाधन, बस एक लाख के आसपास आबादी। टाइम मशीन 1995 की तरफ बढ़ रही है। दोहा में गहमा-गहमी है। हामिद बिन खलीफा अल थानी सत्ता में आ गए हैं। कतर अब गैस निकालकर एलएनजी में बदलेगा। अपने जहाज बनाएगा और पूरी दुनिया के देशों से लंबी अवधि के सौदे करेगा। दोहा के सरकारी गलियारों में तांक-झांक करिए, तो आपको एक किस्सा मिलेगा। जापान के साथ शुरुआती एलएनजी सौदे पर बातचीत हो रही थी। जापानी पक्ष ने पूछा-क्या आप 20 साल तक आपूर्ति की गारंटी दे सकते हैं कतर का जवाब था-हम 40 साल तक दे सकते हैं। यह आत्मविश्वास नहीं, कारोबारी गणित था। उधर देखिए-1996 में जमीन पर पहली कुदाल चली और कुछ वर्षों में बन गया रास लाफान औद्योगिक शहर-दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब। विशाल क्यू-मैक्स जहाज-दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी कैरियर्स यहीं से निकलते हैं। रोबो की आवाज पर ध्यान लगाइए-यह एक ही गैस फील्ड है, कतर ने 1971 में तलाशी। ईरान को 1990 में पता चला। ईरान में राजनीतिक प्रतिबंध और भ्रष्टाचार है। गैस का प्रोजेक्ट समय पर नहीं बना। टाइम मशीन सबसे नाटकीय दौर की तरफ बढ़ रही है। जून, 2017। कतर की तरक्की ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन भी है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में दरारें हैं। सऊदी अरब, अमीरात, बहरीन और मिस्र ने मिलकर कतर की नाकाबंदी कर दी है। आरोप है ईरान से नजदीकी, क्षेत्रीय राजनीति में सबसे अलग नजरिया, मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे समूहों से कथित संबंध और अल-जजीरा की पत्रकारिता। कतर के बाजारों में घबराहट देखिए। दूध और खाद्य आपूर्ति रुक गई है। एकमात्र जमीनी सीमा, जो सऊदी के साथ है, वह बंद हो गई है। अब जो होगा, आश्चर्यजनक होगा। 48 घंटे के अंदर कतर ने तुर्किये से जहाज के जरिये डेयरी प्रोडक्ट मंगवाए। हजारों गायें हवाई जहाज से लाई जा रही हैं। कुछ महीनों में खुद का डेयरी सेक्टर खड़ा कर दिया गया। कतर ने तुर्किये और ईरान के जरिये व्यापार के रास्ते बना लिए। रास लाफान कतर की ताकत है। इसने खेल पलट दिया। एलएनजी आपूर्ति नहीं रुकी। एलएनजी का भूगोल अलग है, यह पाइपलाइन पर निर्भर नहीं। यह समुद्र के रास्ते चलता है। समुद्र किसी का नहीं होता। जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोप-सबको गैस मिलती रही। कॉन्ट्रैक्ट चलते रहे। यह 2021 है। तीन साल बाद अल उला समझौते के तहत नाकेबंदी खत्म हुई। लेकिन अब कतर ज्यादा आत्मनिर्भर है। ज्यादा आत्मविश्वासी और ज्यादा कूटनीतिक। टाइम मशीन लौट रही है। रास लाफान दुनिया की गैस का केंद्र है। एक ऐसा मॉडल, जिसे बाकी देश समझने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोप, अमेरिका, एशिया में भारत, जापान, चीन, सब इसके मोहताज हैं। हम वापस रियाद में उतर रहे हैं। कतर की जमीन के नीचे गैस के साथ जो इतिहास दफन था, वह जाग उठा है। वही ईरान जो कतर का गैस पार्टनर है, जिसने अरब देशों की नाकेबंदी के दौरान मदद की थी, वही अब सबसे बड़ा दुश्मन है। ईरान ने कतर के चमत्कार, उसके भविष्य की ताकत, उसकी जान-रास लाफान पर हमला कर दिया। कतर और उसकी गैस सबको चाहिए। लेकिन कतर को क्या चाहिए सऊदी और अमीरात से करीबी, अमेरिका से दूरी या ईरान से फिर भूल-चूक लेनी-देनी!इतिहास अभी बन रहा है
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 29, 2026, 03:47 IST
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