Prayagraj : संगमनगरी में खुलेगी तिब्बती कला की अनोखी दुनिया थंका , प्रदर्शित होंगे चित्र
संगमनगरी की सांस्कृतिक पहचान को थंका वीथिका के जरिये और मजबूत किया जा रहा है। इलाहाबाद संग्रहालय परिसर में करीब तीन करोड़ रुपये से निर्मित थंका वीथिका का काम अंतिम चरण में है। इसी वर्ष इसे तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए 132 दुर्लभ थंका चित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। संग्रहालय की सह मीडिया प्रभारी डॉ. संजू मिश्रा ने बताया कि थंका चित्रकला तिब्बती-बौद्ध परंपरा की एक विशिष्ट कला है। इसमें सूती या रेशमी कपड़े पर देवी-देवताओं, बोधिसत्वों का चित्रण प्राकृतिक रंगों से किया जाता है। इन चित्रों का उपयोग ध्यान, पूजा और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं के प्रसार के लिए किया जाता रहा है। इन्हें स्क्रॉल पेंटिंग भी कहा जाता है। इलाहाबाद संग्रहालय को संरक्षित 132 थंका चित्र प्रसिद्ध विद्वान डॉ. रघुवीर ने प्रदान किए थे। कपड़े पर निर्मित ये चित्र बुद्ध व मौलिक रूप से बौद्ध वज्रयान तंत्र से प्रभावित हैं। यह संग्रह चीन, तिब्बत, मंगोलिया और बुरयात जैसे देशों की सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। इलाहाबाद संग्रहालय में संग्रहित चित्रों में ग्रीन तारा, श्याम तारा, यामरी जैसी देवियां और वज्रवेग, वज्रसत्व, वैश्रवन, अमिताभ, अमितेश, चतुर्भुज अवलोकितेश्वर और धृतराष्ट्र जैसे लोकपाल के नाम महत्वपूर्ण हैं। थंका शब्द का अर्थ थंका शब्द गतिशीलता का प्रतीक है। इसका अर्थ ऐसे चित्रों से है, जिन्हें पूजा या ध्यान के लिए एक से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता हो।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 11, 2026, 17:05 IST
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