Unmute Bharat: आरक्षण के खिलाफ 60 लाख फॉलोअर्स वाली होगी क्रांति, मेरठ से शुरुआत; अगुवा वेदांश ने क्या बताया?
जिस मेरठ से मंगल पांडेय ने 1857 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ पहली चिंगारी सुलगाई थी, उसी मेरठ का एक युवक अब आरक्षण के खिलाफ देश की सबसे तेज सोशल मीडिया मुहिम का चेहरा बनकर उभरा है।रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन (आरएचए) नाम से चला यह इंस्टाग्राम अभियान महज पांच दिन में करीब 60 लाख फॉलोअर्स तक पहुंच गया, लेकिन इसके पीछे कौन है, यह किसी को पता नहीं था। आरक्षण और जातिवादक्रांति की कैसी तैयारी अमर उजाला ने इस अभियान के सूत्रधार वेदांश त्यागी को सबसे पहले खोजा और उनसे पहला विस्तृत संवाद अपने कार्यक्रम अनम्यूट भारत में किया, जहां उन्होंने बेझिझक कहा कि आरक्षण और जातिवाद के खिलाफ भी वैसी ही क्रांति होगी जैसी उनके शहर से 169 साल पहले शुरू हुई थी। आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई वेदांश ने बताया कि उन्होंने पहले इंस्टाग्राम पर अकेले वीडियो डालनी शुरू की थी। समर्थन और विरोध दोनों मिलने के बाद उन्होंने रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन की शुरुआत की। टीम न होने के कारण उन्होंने सामग्री तैयार करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया, ऐसा उन्होंने बताया। उनका कहना था कि देश को योग्यता आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहिए और उनका अंतिम लक्ष्य आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने अपनी जाति ब्राह्मण सार्वजनिक की, यह कहते हुए कि इससे लोग उन्हें पक्षपाती न समझें। सीजेपी को बताया विदेशी ताकत वेदांश ने कॉकरोच जनता पार्टी को युवा शक्ति मानने से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि सीजेपी के सोशल मीडिया खाते बॉट और पाकिस्तान से जुड़े फॉलोअर्स द्वारा संचालित हैं और इसके खाते अमेरिका में आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक सामने नहीं आई है। उन्होंने सीजेपी और ध्रुव राठी को देश तोड़ने वाला टूलकिट बताया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह विदेशी दबाव में हुआ, हालांकि इसका भी कोई पुख्ता प्रमाण उन्होंने पेश नहीं किया। राजनीतिक दलों से दूरी, फिर भी झुकाव भाजपा की ओर वेदांश के अनुसार भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा सहित कई दलों के नेताओं ने उनसे संपर्क किया, लेकिन उन्होंने किसी भी दल से जुड़ने से इनकार किया। उन्होंने खुद को भाजपा का मतदाता बताया, समर्थक नहीं। उनका मानना है कि आरक्षण में सुधार सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है और बाकी दलों से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार अधिकांश दलों की राजनीति जाति पर टिकी है। 15 अगस्त तक शांति की अपील वेदांश ने समर्थकों से 15 अगस्त तक सड़क पर किसी तरह के प्रदर्शन से बचने की अपील की। उनका कहना था कि विदेशी ताकतें सक्रिय हैं जो शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसा में बदल सकती हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन टकराव की राजनीति नहीं बल्कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श के जरिए बात रखेगा। आरक्षण बीमा की तरह हो, लॉटरी की तरह नहीं वेदांश ने सुझाव दिया कि आरक्षण शारीरिक रूप से अक्षम लोगों और शहीद सैनिकों के परिवारों जैसे वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जाति के आधार पर एक स्कोर प्रणाली बनाने का विचार रखा। उनके शब्दों में आरक्षण लॉटरी नहीं बल्कि बीमा की तरह होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 70 से अधिक वर्षों बाद भी अगर जातिगत तनाव बना हुआ है तो इस व्यवस्था पर नए सिरे से बहस स्वाभाविक है। क्यों चर्चा में है आरएचए जंतर मंतर पर सीजेपी आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर उभरा नया अभियान। इंस्टाग्राम पर पांच दिन में करीब 60 लाख फॉलोअर्स। अभियान का चेहरा लंबे समय तक गुमनाम रहा, अमर उजाला ने पहली बार पहचान सार्वजनिक की। मेरठ की पहचान को 1857 की क्रांति से जोड़ने वाला बयान पहली बार अनम्यूट भारत में सामने आया।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 29, 2026, 03:35 IST
Unmute Bharat: आरक्षण के खिलाफ 60 लाख फॉलोअर्स वाली होगी क्रांति, मेरठ से शुरुआत; अगुवा वेदांश ने क्या बताया? #IndiaNews #National #SubahSamachar
