UP: एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही की फर्म से भी हुई थी नशीले कफ सिरप की सप्लाई, जांच में चौंकाने वाले खुलासे
कोडीनयुक्त फेन्सेडिल कफ सिरप की सप्लाई में एसटीएफ के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का नाम सामने आया है। एसटीएफ आलोक की तलाश में दबिश दे रही है। हालांकि, अभी तक वह उसे पकड़ नहीं सकी है। सूत्रों का कहना है कि जौनपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और मिर्जापुर समेत कई जिलों में एसटीएफ ने छापा मारा, लेकिन आलोक का सुराग नहीं लगा। पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए अमित सिंह टाटा के साथ मिलकर आलोक ने भी अपनी फर्म बनाई थी। आलोक की फर्म से भी नशीले कफ सिरप की सप्लाई की गई थी। उसकी फर्म से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। इस मामले से जुड़ा का एक पन्ना शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ये भी पढ़ें - कोडीन सिरप कांड: धनंजय सिंह के मैसेज से नया मोड़, रखी ये मांग; अमित टाटा की गिरफ्तारी के बाद नाम आया था सामने ये भी पढ़ें - मां की गोद से 10 माह की मासूम को खींच ले गया आदमखोर, खेत में मिला सिर; लाश देख पछाड़ खाकर गिरे घरवाले पन्ने में स्पष्ट लिखा है कि अमित सिंह ने पूछताछ में आलोक का नाम बताया। अमित और आलोक ने विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल और विशाल मेहरोत्रा से बात की थी। सभी के कहने पर दोनों ने जनवरी 2024 में फर्म बनाई थी। फर्म का सारा लेनदेन शुभम, वरुण और उनका सीए देखता था। धनबाद में लगाए थे पांच-पांच लाख रुपये सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अमित ने बताया है कि धनबाद में उसने और आलोक ने पांच-पांच लाख रुपये लगाए थे। इसके एवज में अमित और आलोक को करीब 22 लाख रुपये मिले थे। कफ सिरप की सप्लाई के लिए दोनों कई बार धनबाद भी गए थे। धनबाद का काम वरुण देखता था। आरोपियों ने नशे के इस कारोबार से लाखों रुपये कमाए हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 29, 2025, 20:52 IST
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