राजस्थान: सिरोही में नाम वापसी को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने आरओ पर लगाए आरोप; निलंबन और जांच की मांग

राजस्थान के सिरोही जिले में पंचायतीराज चुनाव के दूसरे चरण की नाम वापसी प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि वे निर्धारित समय से पहले निर्वाचन कार्यालय पहुंच गए थे, इसके बावजूद उनके नाम वापस नहीं हो सके। ग्रामीणों ने निर्वाचन अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्वाचन अधिकारी के निलंबन की मांग की है। वहीं, निर्वाचन अधिकारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की गई। निर्धारित समय से पहले पहुंचने का ग्रामीणों का दावा ग्रामीणों के अनुसार, पंचायतीराज चुनाव के दूसरे चरण के लिए सोमवार को नाम वापसी की प्रक्रिया निर्धारित थी। उनका दावा है कि वे तय समय से पहले ही निर्वाचन कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी नाम वापसी नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी प्रत्याशियों को नियमों के तहत समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी प्रत्याशी के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए। निर्वाचन अधिकारी ने आरोपों को किया खारिज विवाद पर निर्वाचन अधिकारी ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि नाम वापसी की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न कराई गई। निर्वाचन अधिकारी ने किसी तरह के दबाव में काम करने की बात से भी इनकार किया है। ऐसे में ग्रामीणों के दावों और निर्वाचन अधिकारी के पक्ष के बीच विवाद बना हुआ है। राजनीतिक दबाव के आरोप, निलंबन की मांग ग्रामीणों ने निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले में राजनीतिक दबाव की आशंका जताई है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे निर्धारित समय के भीतर कार्यालय पहुंच गए थे, फिर भी नाम वापसी नहीं हो पाई, तो इसकी परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने जांच पूरी होने तक निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल पंचायतीराज चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया प्रत्याशियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में नाम वापसी को लेकर सामने आए विवाद ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों, कार्यालय के रिकॉर्ड और निर्धारित समय से संबंधित तथ्यों की जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 20, 2026, 08:10 IST
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