क्या फंस गए ट्रंप और नेतन्याहू?: अपने विरोधियों को ऐसे झटका देगा ईरान, जानें किस रणनीति पर काम कर रहा
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। अमेरिका-इस्राइल जहां जीत की बात कर रहे हैं, तो वहीं ईरान अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि कहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक लंबे संघर्ष में तो नहीं फंसते जा रहे हैं। दरअसल इस मामले पर विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य रणनीति पारंपरिक युद्ध की तरह जीत हासिल करने की नहीं है। उसका मकसद लंबे समय तक संघर्ष जारी रखना और विरोधियों के लिए युद्ध को महंगा बनाना है। माना जा रहा है कि तेहरान अपनी सैन्य और रणनीतिक ताकत का इस्तेमाल इस तरह कर रहा है कि अमेरिका और इस्राइल को लगातार दबाव में रखा जा सके। ईरान की रणनीति क्या है विश्लेषकों के अनुसार ईरान ने पिछले एक दशक में अपनी सैन्य रणनीति को अलग ढंग से तैयार किया है। उसका ध्यान सीधे सैन्य जीत से ज्यादा अपने शासन और सैन्य ढांचे को सुरक्षित रखने पर है। विशेषज्ञ आमिर अजीमी के अनुसार ईरान को पहले से अंदाजा था कि उसकी बढ़ती क्षेत्रीय भूमिका किसी समय अमेरिका या इस्राइल के साथ सीधे टकराव को जन्म दे सकती है। इसलिए उसने पहले से ही ऐसी रणनीति पर काम किया जिसमें वह लंबी लड़ाई झेल सके और विरोधियों को लगातार थकाता रहे। ये भी पढ़ें-Tehran Oil Depot Attack:ईरान के कई तेल डिपो पर अमेरिका और इस्राइल का बड़ा हमला, तेहरान में धुएं और आग से दहशत डिटरेंस और एंड्यूरेंस की रणनीति कैसे काम करती है दो सिद्धांतों पर आधारित रणनीति ईरान की सैन्य नीति मुख्य रूप से दो सिद्धांतों पर टिकी है। पहला डिटरेंस यानी विरोधी को हमले से रोकने की क्षमता और दूसरा एंड्यूरेंस यानी लंबे समय तक युद्ध झेलने की तैयारी। मिसाइल क्षमता को मजबूत बनाना पिछले एक दशक में ईरान ने बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली विकसित की है। इन मिसाइलों की मदद से वह पश्चिम एशिया में मौजूद कई सैन्य ठिकानों तक हमला कर सकता है। लंबी दूरी के ड्रोन का इस्तेमाल ईरान ने बड़ी संख्या में लंबी दूरी के ड्रोन तैयार किए हैं। ये ड्रोन कम लागत में दूर तक हमला करने की क्षमता रखते हैं और युद्ध के दौरान लगातार दबाव बनाए रखने में मदद करते हैं। क्षेत्रीय सहयोगी समूहों का नेटवर्क ईरान ने पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में सहयोगी सशस्त्र समूहों का नेटवर्क बनाया है। इससे वह अलग-अलग मोर्चों से विरोधियों पर दबाव बना सकता है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दबाव की क्षमता ईरान भले ही अमेरिका की मुख्यभूमि तक हमला नहीं कर सकता, लेकिन पश्चिम एशिया में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसकी मिसाइल और ड्रोन की पहुंच में आते हैं। इस्राइल भी मारक दायरे में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता के कारण इस्राइल भी उसकी सीधी मारक सीमा में आता है। यही वजह है कि ईरान प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय दबाव और प्रतिरोध की रणनीति अपनाता है। युद्ध की आर्थिक लागत बढ़ाने की रणनीति क्यों अहम है विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की रणनीति का बड़ा हिस्सा युद्ध की आर्थिक लागत बढ़ाना भी है। अमेरिका और इस्राइल को आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए बेहद महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसके मुकाबले ईरान कई मामलों में कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करता है। इसका मतलब यह है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो विरोधियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जाएगा। हर सफल हमले का असर केवल सैन्य स्तर पर ही नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी पड़ता है। ऊर्जा मार्ग और समय की भूमिका क्या हो सकती है पश्चिम एशिया में ऊर्जा बाजार भी इस संघर्ष का अहम हिस्सा बन सकता है। फारस की खाड़ी में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को इसे पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है। अगर केवल धमकी या सीमित व्यवधान भी पैदा किया जाए तो इससे वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर समय भी इस संघर्ष में अहम भूमिका निभा सकता है। ईरान के मिसाइल भंडार सीमित हैं, लेकिन इस्राइल की वायु रक्षा प्रणाली पर भी भारी दबाव है और अमेरिका को भी लंबे सैन्य अभियान की लागत और ऊर्जा बाजार पर असर का आकलन करना पड़ रहा है। अन्य वीडियो-
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 08, 2026, 04:42 IST
क्या फंस गए ट्रंप और नेतन्याहू?: अपने विरोधियों को ऐसे झटका देगा ईरान, जानें किस रणनीति पर काम कर रहा #World #International #Iran #Israel #Unitedstates #Middleeastconflict #Militarystrategy #Geopolitics #Waranalysis #Defencestrategy #Globalsecurity #Energypolitics #SubahSamachar
