China-US: चीन की कंपनियों पर अमेरिका ने कसा शिकंजा, पेंटागन ने अलीबाबा-BYD को बताया सैन्य मददगार, लगाए ये आरोप

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तनातनी अब व्यापार और टेक्नोलॉजी कंपनियों तक खुलकर पहुंच गई है। अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने चीन की कई बड़ी कंपनियों को ऐसी सूची में डाल दिया है, जिन्हें चीन की सेना की मदद करने वाला माना जा रहा है। इस सूची में टेक कंपनी अलीबाबा, इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली बीवाईडी और सर्च इंजन कंपनी बायडू जैसी बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं। पेंटागन का कहना है कि ये कंपनियां सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य ताकत बढ़ाने में मदद कर रही हैं। इसी कारण अब इन कंपनियों को अमेरिकी रक्षा ठेकों से बाहर कर दिया गया है। आखिर पेंटागन ने किन कंपनियों को निशाने पर लिया है पेंटागन ने सोमवार को अपनी नई सूची जारी की। इसमें चीन की 188 कंपनियों को शामिल किया गया है। पिछले साल यह संख्या करीब 130 थी। इस बार सूची में उन कंपनियों को भी जोड़ा गया है, जिन्हें अब तक आम कारोबारी कंपनियां माना जाता था। अलीबाबा दुनिया की बड़ी ई-कॉमर्स और क्लाउड कंपनी है। वहीं, बीवाईडी इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की बड़ी कंपनी बन चुकी है। बायडू चीन का प्रमुख सर्च इंजन है। इनके अलावा रोबोट बनाने वाली यूनिट्री कंपनी को भी सूची में डाला गया है। ये भी पढ़ें-PM मोदी के सत्ता में 12 साल:सबसे लंबी अवधि तक चुने हुए पीएम रहने के रिकॉर्ड की बराबरी, क्या रहीं उपलब्धियां अमेरिका को चीन की किस रणनीति से डर है अमेरिका का आरोप है कि चीन अपनी निजी कंपनियों और रिसर्च संस्थानों का इस्तेमाल सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है। पेंटागन के मुताबिक चीन ऐसी कंपनियों से आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता हासिल करता है, जो बाहर से आम कारोबारी संस्थान दिखते हैं। अमेरिका को चिंता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक वाहन, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें भविष्य में सैन्य उपयोग में लाई जा सकती हैं। इसी वजह से अमेरिका अब केवल हथियार बनाने वाली कंपनियों ही नहीं, बल्कि टेक और ऑटो कंपनियों पर भी नजर रख रहा है। इस सूची में आने से कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा पेंटागन की सूची में आने के बाद ये कंपनियां सीधे अमेरिकी रक्षा विभाग के ठेके नहीं ले सकेंगी। हालांकि वे अभी भी अमेरिका में कारोबार कर सकती हैं। लेकिन इस फैसले से उनकी छवि पर असर पड़ सकता है। साथ ही आगे चलकर अमेरिका इन पर और सख्त प्रतिबंध भी लगा सकता है। अलीबाबा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है। वहीं BYD दुनिया के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से आगे बढ़ रही है। अमेरिकी संसद के कई सांसद पहले ही चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। चीन ने अमेरिका के आरोपों पर क्या जवाब दिया चीन के दूतावास ने अमेरिका के फैसले की आलोचना की है। चीन ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भेदभावपूर्ण सूची बना रहा है और चीनी कंपनियों को निशाना बना रहा है। दूतावास का कहना है कि चीनी कंपनियां जिन देशों में काम करती हैं, वहां के कानूनों का पालन करती हैं। चीन ने अमेरिका से निष्पक्ष और गैर-भेदभाव वाला कारोबारी माहौल देने की मांग की है। हालांकि जिन कंपनियों के नाम सूची में आए हैं, उनकी तरफ से तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। दुनिया और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती कारोबारी लड़ाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक वाहन, टेक्नोलॉजी, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसे सेक्टर में सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा है। भारत के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि कई चीनी कंपनियां भारतीय बाजार में भी सक्रिय रही हैं। अगर अमेरिका आगे और सख्त कदम उठाता है तो इसका असर वैश्विक निवेश, टेक बाजार और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग पर दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला और तेज हो सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 09, 2026, 06:29 IST
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