US: टैरिफ से व्यापार युद्ध का खतरा, मंदी में फंस सकती है दुनिया; वैश्विक निर्यात में 1.6 फीसदी गिरावट की आशंका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क लगाने से पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ गया है। इस कदम से वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त होने के साथ दुनियाभर में महंगाई और बेरोजगारी तेजी से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के इस फैसले के बाद अन्य प्रभावित देश अगर जवाबी कदम उठाते हैं, तो स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे दुनिया के मंदी में फंसने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने एक नोट ने कहा, चीन जैसे कुछ देश अमेरिका के खिलाफ जवाबी कदमों की घोषणा कर सकते हैं, जिससे दुनियाभर में व्यापार युद्ध का दौर शुरू हो जाएगा। इससे न सिर्फ महंगाई बहुत अधिक बढ़ेगी, बल्कि मंदी का खतरा भी रहेगा। हालांकि, कई अर्थव्यवस्थाएं पीछे के रास्ते से बातचीत कर हालात को आसान करने की कोशिश करेंगी, जिससे स्थिति कुछ बेहतर होने की उम्मीद की जा सकती है। एक अन्य ब्रोकरेज कंपनी जेपी मॉर्गन का मानना है कि नए टैरिफ से बड़ी आर्थिक गिरावट आ सकती है। इससे अमेरिका व वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों मंदी के दलदल में फंस सकते हैं। जेपी मॉर्गन का विश्लेषण बताता है कि अगर ये शुल्क पूरी तरह लागू हुए, तो अमेरिका की प्रभावी टैरिफ दर 25 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकती है, जो 3.3 लाख करोड़ डॉलर के अमेरिकी उत्पादों के आयात पर असर डाल सकती है। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, इन नीतियों का पूरी तरह लागू होना एक बड़ा आर्थिक झटका होगा। ये झटका दुनियाभर की बाजार की धारणा पर असर डालेगा। इसलिए, आने वाले दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि नए टैरिफ का लागू होना और बातचीत की प्रक्रिया इनके लंबे समय के असर को तय करेगी। एचएसबीसी ने एक शोध रिपोर्ट में कहा, टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार की रफ्तार धीमी हो सकती है। वैश्विक निर्यात की वृद्धि दर 2024 के 2.9 फीसदी से 1.6 फीसदी घटकर 2025-26 में महज 1.3 फीसदी रह सकती है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका में मांग में कमी और वैश्विक निवेश-व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। यह गिरावट अमेरिकी आयात में कमी और व्यापारिक नीतियों की अस्पष्टता के कारण वैश्विक निवेश में पड़ने वाला नकारात्मक असर है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में एक फीसदी घटी थी वैश्विक जीडीपी एचएसबीसी ने कहा, ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान व्यापारिक तनाव और टैरिफ की वजह से दो वर्षों में वैश्विक जीडीपी में करीब एक फीसदी की गिरावट आई थी। लेकिन, इस बार टैरिफ पहले के मुकाबले अधिक व्यापक और गंभीर हैं। महंगाई : दो फीसदी बढ़ने का खतरा जेपी मॉर्गन ने बताया, टैरिफ का महंगाई पर असर होगा। इस साल पूरी दुनिया में महंगाई दो फीसदी बढ़ सकती है। महंगाई बढ़ने से न सिर्फ मांग और खपत में गिरावट आएगी, बल्कि बेरोजगारी बढ़ने की भी आशंका है। निकट भविष्य में बाजार में उथल-पुथल बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता से निकट भविष्य में सुधार और बाजार में उथल-पुथल हो सकती है, लेकिन लंबे समय में दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। एक्सिस सिक्योरिटीज ने कहा, टैरिफ की सीमा, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक हो गई है, के कारण निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा, ये उपाय स्वाभाविक रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा को जटिल बना सकते हैं। व्यापार में व्यवधान बढ़ने से अमेरिका में मंदी आ सकती है, जो पूरी दुनिया को प्रभावित करेगी। एक्सिस सिक्योरिटीज इसे एक अवसर के रूप में देखती है और 10% तक निवेश बढ़ाने और बाजार में गिरावट का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश की सिफारिश करती है। 0.5% घट जाएगी भारत की जीडीपी ईवाई का मानना है कि 27 फीसदी टैरिफ से भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 0.5 फीसदी तक घट सकती है। इससे जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6 फीसदी रह सकती है। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष में अमेरिका को निर्यात में 2-3 फीसदी की गिरावट आ सकती है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की भारत में आर्थिक शोध प्रमुख अनुभूति सहाय ने कहा, अन्य बातों के समान रहने पर भारत की वृद्धि दर पर 0.35 से 0.40 फीसदी तक असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम असर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर निर्भर करेगा। इसे भी पढ़ें-US Tariffs:ट्रंप के जवाबी टैरिफ का भारत को फायदा या नुकसान, कैसे खुद अमेरिका को झेलनी पड़ सकती है परेशानी बातचीत से रास्ता निकाल लेगा भारत बर्नस्टीन का मानना है कि आईटी और फार्मा क्षेत्र को टैरिफ से छूट दी गई है। ये सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी हैं। इससे भारत को राहत मिलेगी। उधर, चीन को होने वाले नुकसान से भारत को फायदा हो सकता है, क्योंकि चीनी उत्पादों पर टैरिफ और भी ज्यादा है। निवेश के मोर्चे पर ब्रोकरेज कंपनी का कहना है, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता चल रही है, उससे भारत चुनौतियों से निपट लेगा और व्यापार युद्ध बढ़ाने के बजाय अमेरिका से बातचीत करेगा। इसे भी पढ़ें-Share Market Opening Bell:ट्रंप के जवाबी टैरिफ से सहमा शेयर बाजार; सेंसेक्स 800 अंक गिरा, निफ्टी भी फिसला
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 04, 2025, 07:06 IST
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