अमेरिका का सख्त संदेश: विदेश में फंसे बच्चों की वापसी में देरी हुई तो किसका वीजा होगा बैन, क्या है नया नियम?

अमेरिका ने दूसरे देशों में फंसे या ले जाए गए अमेरिकी बच्चों को वापस उनके माता-पिता तक पहुंचाने के लिए नई नीति बनाई है। अब अगर किसी दूसरे देश का अधिकारी बच्चे को उसके माता-पिता या उसके रहने वाले देश में वापस भेजने की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करता है, तो अमेरिका उसका वीजा रोक सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को इस नई नीति का एलान किया। इसके तहत सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के करीबी सदस्यों पर भी वीजा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह मामला तब सामने आता है, जब कोई माता-पिता अपने बच्चे को दूसरे देश में ले जाता है या बच्चे को वहीं रोक लेता है और दूसरा माता-पिता बच्चे को वापस लाने की कोशिश करता है। ऐसे मामलों में अदालत या संबंधित अधिकारी बच्चे को उसके सामान्य रहने वाले देश में वापस भेजने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि अगर कोई अधिकारी जानबूझकर ऐसे कानून, सरकारी नियम या अदालत के आदेश को लागू नहीं करता, तो उसके खिलाफ वीजा कार्रवाई की जा सकती है। यानी अमेरिका अब ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर दबाव बनाने के लिए वीजा को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा। ये भी पढ़ें-एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर ने दिया इस्तीफा: एक साल बाद क्यों छोड़ी जिम्मेदारी, ट्रंप और काश पटेल पर क्या कहा किस अधिकारी पर हो सकती है वीजा कार्रवाई नई नीति में कई तरह के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें दूसरे देशों के सरकारी अधिकारी, जज, अदालत से जुड़े अधिकारी और पुलिस या कानून लागू कराने वाले अधिकारी शामिल हैं। अगर इनमें से कोई व्यक्ति जानबूझकर बच्चे को उसके सामान्य देश में वापस भेजने की प्रक्रिया रोकता है या मामले को लटकाता है, तो अमेरिका उस व्यक्ति का वीजा रोक सकता है। इतना ही नहीं, उसके करीबी परिवार के सदस्यों पर भी वीजा प्रतिबंध लगाया जा सकता है। अमेरिका का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी होने से बच्चा लंबे समय तक अपने माता-पिता से दूर रहता है। अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया अमेरिका के मुताबिक उसका मुख्य उद्देश्य दूसरे देशों में ले जाए गए अमेरिकी बच्चों को सुरक्षित तरीके से वापस लाना है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बच्चों को उनके माता-पिता से दोबारा मिलाना ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ऐसे मामलों को रोकने और बच्चों को जल्द वापस लाने के लिए पहले से काम करता है। अब नई वीजा नीति के जरिए उन लोगों पर भी दबाव बनाया जाएगा, जो बच्चे को वापस भेजने की प्रक्रिया में जानबूझकर रुकावट डालते हैं। अमेरिका का कहना है कि बच्चों और उनके परिवारों को लंबे समय तक अलग नहीं रखा जाना चाहिए। क्या सिर्फ बच्चे को रोकने वाले माता-पिता पर ही कार्रवाई होगी नई नीति का मुख्य निशाना केवल बच्चे को दूसरे देश ले जाने वाला माता-पिता नहीं है। इसका खास जोर उन अधिकारियों पर है, जो बच्चे की वापसी की प्रक्रिया में जानबूझकर रुकावट डालते हैं। उदाहरण के लिए अगर अदालत ने बच्चे को उसके सामान्य देश में वापस भेजने का आदेश दिया, लेकिन कोई अधिकारी जानबूझकर उस आदेश को लागू नहीं करता, तो अमेरिका उसके खिलाफ वीजा कार्रवाई कर सकता है। रुबियो ने कहा कि यह नीति अमेरिका को ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने का एक नया तरीका देती है। इसका मकसद दूसरे देशों को उनकी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए दबाव में लाना है। भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर हो सकता है अमेरिका ने इस नीति की घोषणा करते समय किसी खास देश के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की बात नहीं कही है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग अंतरराष्ट्रीय बाल अपहरण से जुड़े मामलों को अलग-अलग देशों के हिसाब से देखता है। भारत से जुड़े मामलों के लिए भी अमेरिकी विदेश विभाग अलग जानकारी उपलब्ध कराता है। नई नीति के तहत अगर किसी मामले में किसी विदेशी अधिकारी पर बच्चे की वापसी रोकने या जानबूझकर देरी करने की जिम्मेदारी तय होती है, तो अमेरिका उसके खिलाफ वीजा प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है। अमेरिका का कहना है कि इस कदम का मकसद बच्चों को सुरक्षित तरीके से उनके सामान्य देश और परिवार तक वापस पहुंचाना है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 29, 2026, 03:57 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




अमेरिका का सख्त संदेश: विदेश में फंसे बच्चों की वापसी में देरी हुई तो किसका वीजा होगा बैन, क्या है नया नियम? #World #International #UsVisaPolicy #ChildAbduction #MarcoRubio #DonaldTrump #InternationalChildCustody #HagueConvention #VisaRestrictions #UsStateDepartment #SubahSamachar